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यूपी में जनता ने आदित्यनाथ ब्रांड राजनीति को नकारा? जानिए, बीजेपी की हार के कारण

7 वर्ष पहले
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फाइल फोटो: गोरखपुर से सांसद महंत आदित्यनाथ।
नई दिल्ली. विधानसभा उपचुनाव में उत्‍तर प्रदेश में भाजपा की करारी हार परगोरक्षपीठाधीश्वर और गोरखपुर से सांसद महंत आदित्यनाथ ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा है, "मैं नोएडा और लखनऊ गया था, जहां हमें जीत मिली। कई जगहों पर मेरी सभाएं नहीं होने दी गई थीं। उत्तर प्रदेश सरकार ने अपनी सत्ता का गलत इस्तेमाल किया। कई सीटों पर पैसे बांटे गए।" जबकि सच यह है कि आदित्यनाथ ने बिजनौर में भी सभा की थी। उसी सभा में आदित्यनाथ ने विवादित बयान दिया था कि अब कोई जोधा किसी अकबर के साथ नहीं जाएगी, बल्कि दुष्ट सिकंदर अपनी पुत्री किसी चंद्रगुप्त मौर्य को देगा।
10 राज्यों की 33 विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव में बीजेपी को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है। पार्टी को सबसे बड़ा झटका उत्तर प्रदेश और राजस्थान में लगा है। लोकसभा चुनाव में 80 में से 71 सीटें जीतने वाली बीजेपी ने महंत आदित्यनाथ को इन चुनावों में आगे किया था। आदित्यनाथ ने 'लव जिहाद' का मुद्दा उठाया था और भगवान राम के नाम पर लोगों से वोट मांगे थे। लेकिन उत्तर प्रदेश की 11 विधानसभा सीटों में से बीजेपी नोएडा, सहारनपुर और लखनऊ पूर्व पर ही जीत दर्ज कर सकी। बाकी सभी सीटें सपा के खाते में गईं।
राजस्थान में चार सीटों के लिए हुए उपचुनाव में सत्ताधारी बीजेपी सिर्फ एक सीट पर जीत सकी है। वहीं, कांग्रेस के खाते में तीन सीटें आई हैं। गुजरात में बीजेपी ने सात सीटें जीती हैं, जबकि कांग्रेस के खाते में दो सीटें आई हैं।
यूपी में बीजेपी की हार के कारण
यूपी में जिन 11 सीटों पर उपचुनाव हुए हैं, उनमें से 10 बीजेपी और एक उसकी सहयोगी अपना दल के पास थी। वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश ने यूपी में बीजेपी की हार के लिए योगी आदित्यनाथ जैसे नेताओं की आक्रामक हिंदुत्व की राजनीति को दोषी माना है। उर्मिलेश का कहना है कि मोदी के विकास के नारों पर उपचुनाव में सांप्रदायिकता भारी पड़ी। भाजपा के फायरब्रांड नेता और उपचुनाव के इंचार्ज महंत आदित्यनाथ ने सूबे में कई जगहों पर सांप्रदायिक बयान दिए थे। उन्होंने पार्टी के अन्य नेताओं के साथ 'लव जिहाद' के मुद्दे को खूब हवा दी थी। बीजेपी की हार की दूसरी बड़ी वजह गुटबाजी और अंदरूनी कलह को माना जा रहा है। मुरादाबाद के ठाकुरद्वारा से बीजेपी सांसद सर्वेश सिंह अपने बेटे के लिए टिकट चाहते थे, नहीं मिला तो प्रचार से कन्नी काट ली। लखीमपुर के निघासन में सांसद अजय मिश्रा और पार्टी उम्मीदवार रामकुमार वर्मा में बनी नहीं और बीजेपी सीट हार गई।
सपा को कैसे हुआ फायदा
वरिष्ठ पत्रकार विनोद शर्मा के मुताबिक, बीजेपी की सांप्रदायिक राजनीति, बीएसपी का मैदान में न होना और सत्ता में होने का फायदा सपा को मिला।
राजस्थान में बीजेपी की हार के कारण
राजस्थान में बीजेपी की सरकार 9 महीने से वजूद में है। कई लोगों का मानना है कि राजस्थान में वसुंधरा सरकार का सत्ता का घमंड उन पर भारी पड़ा। कांग्रेस के नेता सचिन पायलट का कहना है कि वुसंधरा सरकार ने अशोक गहलोत की पूर्व सरकार की कई लोकप्रिय योजनाओं को बंद कर दिया। इस वजह से जनता ने बीजेपी को नकार दिया।
कांग्रेस को कैसे हुआ फायदा
उपचुनाव में अशोक गहलोत, सीपी जोशी, बीडी कल्ला, गिरिजा व्यास जैसे वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं ने सचिन पायलट के साथ मिलकर काम किया। कांग्रेस में भितरघात नहीं दिखी। सचिन पायलट ने चुनाव प्रचार में मेहनत की।
गुजरात में बीजेपी की जीत के कारण
गुजरात में बीजेपी का दबदबा कायम है। नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद आनंदीबेन पटेल ने मुख्यमंत्री के रूप में सूबे की कमान संभाली है। उपचुनाव के नतीजे बताते हैं कि वहां की जनता ने आनंदीबेन को स्वीकार किया है। राज्य में कांग्रेस के कमजोर नेतृत्व का फायदा भी बीजेपी को मिला है।
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