नई दिल्ली. भाजपा अध्यक्ष
अमित शाह बेटे जय की शादी के बाद अब रिसेप्शन की तैयारियों में लगे हैं। वह 12 तारीख को अहमदाबाद में रिसेप्शन पार्टी दे रहे हैं। फिर रविवार को दिल्ली, इसके बाद मुंबई और अहमदाबाद में भी पार्टी होगी। लेकिन, इन पार्टियों में कितनी रौनक रहेगी, इस बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता। क्योंकि, मंगलवार को शादी में शाह ने कोई रौनक नहीं होने दी। बताया जाता है कि उन्होंने बैंड बंद करवा दिया, पटाखे नहीं चलाने दिए और कुछ रस्में भी टलवा दीं। ऐसा दिल्ली चुनाव में बीजेपी की करारी हार की खबर मिलने के बाद किया गया था।
मंगलवार को जब दिल्ली में वोटों की गिनती चल रही थी, तो शाह अहमदाबाद के वाईएमसीए क्लब में बेटे जय की रिशिता से शादी करवा रहे थे। वहां मौजूद एक सूत्र के मुताबिक, सवेरे दस बजे से ही भाजपा की हार के संकेत मिल गए थे और शाह के चेहरे पर तनाव साफ दिख रहा था। वह बार-बार आयोजन स्थल से बाहर जा रहे थे और अंदर आ रहे थे। बरात के समय भी उनका मूड उखड़ा हुआ था। पत्रकार विवाह स्थल के बाहर
दिल्ली चुनाव के बारे में उनकी प्रतिक्रिया जानने के लिए घंटों खड़े रहे, लेकिन अमित शाह उनसे बात किए बिना ही अपनी कार से निकल गए।
मंगलवार सुबह 10 बजे जैसे ही यह बात साफ हुई कि बीजेपी चुनाव में हार गई है, अमित शाह वेन्यू पर आए और बैंड-बाजा बंद करवा दिया। इसके बाद पूरी शादी में एक बार भी बैंड नहीं बजा। बरात के दौरान कोई आतिशबाजी नहीं हुई। पहले माना जा रहा था कि शाह जय और रिश्तिा की शादी धूमधाम से करेंगे। शादी में मौजूद लोगों का कहना है कि विवाह सादगी से संपन्न हुआ
प्रधानमंत्री
नरेंद्र मोदी भी शादी में नहीं पहुंच पाए। दिग्गज नेताओं में भाजपा के वयोवृद्ध नेता लालकृष्ण आडवाणी, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, राजनाथ सिंह और पीयूष गोयल, जेपी नड्डा, राजीव प्रताप रूडी शादी में मौजूद थे। गुजरात की मुख्यमंत्री आनंदी बेन पटेल और उनकी सरकार के कई मंत्री भी समारोह में शामिल हुए। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नेता सुरेश
सोनी, विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष अशोक सिंघल, योग गुरू बाबा रामदेव और उद्योगति मुकेश अंबानी, नीता अंबानी और गौतम अदानी भी विवाह समारोह में नजर आए।
लोकसभा चुनावों के बाद पीएम मोदी और अमित शाह की जोड़ी ने जो चुनाव लड़ा, वो सब जीता। दिल्ली की हार 13 साल में इस जोड़ी की पहली हार है। अमित शाह ने 19 साल की उम्र में चुनाव प्रबंधन शुरू किया था। को-ऑपरेटिव से लेकर पार्लियामेंट तक के तीन दर्जन से अधिक चुनावों का प्रबंधन उन्होंने किया है।