पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • Delhi Election : अब न भाजपा विपक्ष में रही, न ग़ुस्से के वोट पर उसका हक रहा

दिल्ली में वोट प्रतिशत का क्या मतलब?

6 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
नवनीत गुर्जर. पहले कहीं भी 60-65% से ऊपर वोटिंग होती थी तो माना जाता था कि भाजपा जीतेगी। इसके पीछे मान्यता ये थी कि वोट ज्यादा पड़े मतलब लोग ग़ुस्से में घर से निकले हैं और ग़ुस्से का वोट मौजूदा सरकार के खिलाफ ही जाता है। भाजपा हमेशा विपक्ष में ही होती थी। दूसरी वजह ये भी थी कि ग़ुस्से में वे पढ़े लिखे और बड़े लोग भी वोट देने आए होंगे जो अक्सर वोट देते ही नहीं।
अब हालात बदल गए हैं। न तो भाजपा विपक्ष में रही, न ग़ुस्से के वोट पर उसका पूरा हक़ ही रहा। दिल्ली में सत्ता या व्यवस्था या हर चीज़ से ही नाराज़ व्यक्ति का वोट आम आदमी पार्टी को जाएगा।
लोग पिछले लोकसभा चुनाव में दिल्ली में पड़े 65 प्रतिशत वोट का उदाहरण देते हैं। तब भाजपा सातों सीटें जीत गई थी लेकिन तब भाजपा सत्ता में नहीं थी। वोट कांग्रेस के खिलाफ ज्यादा पड़ा, भाजपा के पक्ष में कम। अब ऐसे हालात नहीं हैं।
तो दिल्ली में हो रही वोटिंग को कैसे समझें? इस सवाल का जवाब यही है कि कम वोटिंग हुई यानी साठ प्रतिशत से कम, तो निश्चित ही आम आदमी पार्टी जीतेगी। लेकिन ज्यादा यानी 60 से 70 प्रतिशत तक तो भी भाजपा की जीत पक्की नहीं कही जा सकती। दरअसल एक बड़ी पार्टी को हम भूल नहीं सकते। कांग्रेस को। पहले कांग्रेस के पढ़े लिखे वोट भाजपा की तरफ चले जाते थे लेकिन अब ऐसा नहीं है। कांग्रेस का वोट टूट कर आम आदमी की तरफ जाएगा।