(फाइल फोटो)
नई दिल्ली. बिना इजाजत किसी का डीएनए टेस्ट नहीं किया जा सकता। सिर के बाल से भी नहीं। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को यह व्यवस्था दी है।
कोर्ट गुमशुदा लोगों और अज्ञात शवों से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी। 'लोकनीति फाउंडेशन' ने यह याचिका दायर की है। उसने मांग की कि सरकार को अज्ञात शव और गुमशुदा लाेगों का डीएनए डाटाबेस तैयार करने के निर्देश दिए जाएं। इससे पता लग सकता है कि दोनों के बीच कोई संबंध तो नहीं है। ऐसे मामलों में किसी के बाल से भी डीएनए का पता लग जाता है। और बाल आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं। लेकिन जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि बिना इजाजत किसी का डीएनए टेस्ट नहीं कराया जा सकता। हालांकि बेंच ने केंद्र से यह जरूर पूछा कि क्या अज्ञात शवों और गुमशुदा लाेगों का डाटाबेस तैयार करने का क्या तरीका हो सकता है? कोर्ट ने सरकार से चार हफ्ते में जवाब देने को कहा गया है।
सरकार ने बताया- विधेयक ला रहे हैं
कोर्ट के सवाल पर एडिशनल सॉलिसीटर जनरल एनके. कौल ने बताया कि केंद्र सरकार अज्ञात शव और गुमशुदा लोगों की डीएनए प्रोफाइलिंग करने संबंधी विधेयक ला रही है। लेकिन यह विधेयक बेहद जटिल है। इसमें राइट टू प्राइवेसी से जुड़ा मामला भी है। विधेयक को आसान बनाने के प्रयास जारी हैं।