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इनोवेटिव: क्लाउड कंप्यूटिंग से सुलझी कचरे की समस्या

7 वर्ष पहले
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बंगलुरू. ईटी सिटी बंगलुरू में क्लाउड कम्प्यूटिंग के जरिए कचरे की समस्या का समाधान ढूंढ़ निकाला है प्रशांत मेहरा ने। वे आईआईटी खड़गपुर के ग्रेजुएट हैं। माइंड ट्री के इस सॉफ्टवेयर इंजीनियर का डेसिग्नेशन है चीफ आर्किटेक ऑफ सोशल इंक्लूजन। अपनी इस टेक्नोलॉजी के जरिए प्रशांत कचरा बीनने वालों को काम करने की बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने की कोशिश कर रहे हैं। अब कचरे वालों की सभी जानकारी क्लाउड पर रिकॉर्ड होती है। उन्हें अपने काम के पूरे पैसे मिलते हैं।
कोई स्क्रैप डीलर उनके साथ बेइमानी नहीं कर पाता। इसलिए उनकी कमाई डबल से भी ज्यादा हो गई है, जोे लोग बमुश्किल 1000 रु महीना कमाते थे अब 4000 रु कमा रहे हैं। किस वॉर्ड से कितना कचरा निकल रहा है इसका पूरा डाटा भी रखा जाता है। प्रशांत कहते हैं 2012 में बंगलुरू म्युनिसिपल के कचरा कलेक्टर्स ने हड़ताल कर दी थी। पूरा शहर कचरे से भर गया था। तभी उन्हें ये टेक्नोलॉजी डेवलप करने का विचार आया। प्लान का नाम रखा है आय गॉट गारबेज। इस तकनीक के जरिए 5000 रैगपिकर्स यानी कचरा बीनने वालों को रजिस्टर किया गया है। उन्हें यूनीफॉर्म और आईडेंटिटी टैग दिए गए हैं। अब वे भी खुद को प्रोफेशनल्स महसूस करने लगे हैं। इसमें 24 एनजीओ उनकी मदद कर रहे हैं। उनका अगला लक्ष्य है 4000 प्रति महीने को 7000 तक पहुंचाना। माइंड ट्री कंपनी ने इस पूरे प्रोजेक्ट के लिए टेक्निकल असिस्टेंस दिया है।