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'देशद्रोह'- संत रामपाल से पहले भी कई मामले, जानिए क्या है यह कानून

7 वर्ष पहले
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(फाइल फोटोः संत रामपाल महाराज)
नई दिल्ली. गैर जमानती वारंट के बावजूद अवमानना के मामले में कोर्ट में पेश न होकर हरियाणा सरकार के लिए चुनौती बने सतलोक आश्रम (हिसार) के संचालक संत रामपाल को गिरफ्तार करने में नाकाम रही पुलिस ने बुधवार को रामदास पर देशद्रोह का मामला दर्ज किया है। हत्या के मामले में वांछित रामपाल के जरिए यह कानून एक बार फिर सुर्खियों में है। हालांकि इससे पहले भी कईयों पर देशद्रोह का मामला दर्ज किया गया। उनके बारे में जानने से पहले ये जानना जरूरी है कि देशद्रोह का मामला आखिर है क्या और ये क्यों और किन कारणों में लगाया जाता है। dainikbhaskar.com आपको यह जानकारी दे रहा है।
ब्रिटिश राज का कानून है देशद्रोह
किसने बनाया - सैडीशन लॉ यानि देशद्रोह कानून ब्रिटिश सरकार की देन है। आजादी के बाद इसे भारतीय संविधान ने अपना लिया।
सबसे पहले इस्तेमाल- 1870 में बने इस कानून का इस्तेमाल ब्रितानी सरकार ने महात्मा गांधी और बालगंगाधर तिलक के खिलाफ किया था।
क्या कहता है कानून- भारतीय कानून संहिता (आईपीसी) की धारा 124-ए में देशद्रोह की दी हुई परिभाषा के मुताबिक, अगर कोई भी व्यक्ति सरकार-विरोधी सामग्री लिखता है या बोलता है या फिर ऐसी सामग्री का समर्थन करता है, या राष्ट्रीय चिन्हों का अपमान करने के साथ संविधान को नीचा दिखाने की कोशिश करता है, तो उसे आजीवन कारावास या तीन साल की सजा हो सकती है।
ब्रिटेन ने हटाया, भारत ने अपनाया- आश्चर्यजनक तथ्य यह है कि अब ब्रिटेन ने ये कानून अपने संविधान से हटा दिया है, लेकिन भारत के संविधान में ये विवादित कानून आज भी मौजूद है।
नेहरू का था विरोधः आपको जानकर आश्चर्य होगा कि देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने भी इसे 'बेहद आपत्तिजनक और अप्रिय' कानून बताया था।
विरोधाभास भी-
देशद्रोह के कानून को लेकर संविधान में विरोधाभास भी है, जिसे लेकर अक्सर विवाद उठते रहे हैं। दरअसल, जिस संविधान ने देशद्रोह को कानून बनाया है, उसी संविधान में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को भारत के नागरिकों का मौलिक अधिकार बताया गया है। मानवाधिकार और सामाजिक संगठनों के कार्यकर्ता इसी तर्क के साथ अपना विरोध जताते रहे हैं और आलोचनाएं करते रहे हैं।
आगे की स्लाइड्स में- किन-किन पर लगा देशद्रोह का कानून और क्या थे मामला