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'देशद्रोह'- संत रामपाल से पहले भी कई मामले, जानिए क्या है यह कानून / 'देशद्रोह'- संत रामपाल से पहले भी कई मामले, जानिए क्या है यह कानून

संत रामपाल पर देशद्रोह का आरोप लगा है। यह पहली बार नहीं है। इससे पहले भी कईयों पर मामले दर्ज हुए हैं।

Nov 19, 2014, 02:45 PM IST
जानिए क्या होता है देशद्रोह, क्या है सजा और अब तक किन पर चले मुकदमे
(फाइल फोटोः संत रामपाल महाराज)
नई दिल्ली. गैर जमानती वारंट के बावजूद अवमानना के मामले में कोर्ट में पेश न होकर हरियाणा सरकार के लिए चुनौती बने सतलोक आश्रम (हिसार) के संचालक संत रामपाल को गिरफ्तार करने में नाकाम रही पुलिस ने बुधवार को रामदास पर देशद्रोह का मामला दर्ज किया है। हत्या के मामले में वांछित रामपाल के जरिए यह कानून एक बार फिर सुर्खियों में है। हालांकि इससे पहले भी कईयों पर देशद्रोह का मामला दर्ज किया गया। उनके बारे में जानने से पहले ये जानना जरूरी है कि देशद्रोह का मामला आखिर है क्या और ये क्यों और किन कारणों में लगाया जाता है। dainikbhaskar.com आपको यह जानकारी दे रहा है।
ब्रिटिश राज का कानून है देशद्रोह
किसने बनाया - सैडीशन लॉ यानि देशद्रोह कानून ब्रिटिश सरकार की देन है। आजादी के बाद इसे भारतीय संविधान ने अपना लिया।
सबसे पहले इस्तेमाल- 1870 में बने इस कानून का इस्तेमाल ब्रितानी सरकार ने महात्मा गांधी और बालगंगाधर तिलक के खिलाफ किया था।
क्या कहता है कानून- भारतीय कानून संहिता (आईपीसी) की धारा 124-ए में देशद्रोह की दी हुई परिभाषा के मुताबिक, अगर कोई भी व्यक्ति सरकार-विरोधी सामग्री लिखता है या बोलता है या फिर ऐसी सामग्री का समर्थन करता है, या राष्ट्रीय चिन्हों का अपमान करने के साथ संविधान को नीचा दिखाने की कोशिश करता है, तो उसे आजीवन कारावास या तीन साल की सजा हो सकती है।
ब्रिटेन ने हटाया, भारत ने अपनाया- आश्चर्यजनक तथ्य यह है कि अब ब्रिटेन ने ये कानून अपने संविधान से हटा दिया है, लेकिन भारत के संविधान में ये विवादित कानून आज भी मौजूद है।
नेहरू का था विरोधः आपको जानकर आश्चर्य होगा कि देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने भी इसे 'बेहद आपत्तिजनक और अप्रिय' कानून बताया था।
विरोधाभास भी-
देशद्रोह के कानून को लेकर संविधान में विरोधाभास भी है, जिसे लेकर अक्सर विवाद उठते रहे हैं। दरअसल, जिस संविधान ने देशद्रोह को कानून बनाया है, उसी संविधान में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को भारत के नागरिकों का मौलिक अधिकार बताया गया है। मानवाधिकार और सामाजिक संगठनों के कार्यकर्ता इसी तर्क के साथ अपना विरोध जताते रहे हैं और आलोचनाएं करते रहे हैं।
आगे की स्लाइड्स में- किन-किन पर लगा देशद्रोह का कानून और क्या थे मामला
इंटरव्यू देना कविता को पड़ा महंगा इंटरव्यू देना कविता को पड़ा महंगा
के. कविता
 
कौन हैं- निजामाबाद से टीआरएस सांसद, तेलंगाना सीएम के.चंद्रशेखर राव (केसीआर) की बेटी

कब लगा- अगस्त 2014
क्या था मामलाः कविता पर आरोप था कि उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा, जम्मू-कश्मीर और तेलंगाना पहले भारत के हिस्से नहीं थे। पेशे से वकील के. करुणासागर की शिकायत पर स्थानीय अदालत ने पुलिस को निर्देश दिया कि वह कविता के खिलाफ देशद्रोह का मामला दर्ज करे। इसेक बाद कविता के खिलाफ आईपीसी की धारा 124-ए (देशद्रोह) और 505 (सार्वजनिक शरारत को प्रेरित करना) के तहत मामला दर्ज किया गया। 
 
असीम का 'देशद्रोही कार्टून' असीम का 'देशद्रोही कार्टून'
असीम त्रिवेदी
 
कौन हैं- मशहूर कार्टूनिस्ट
कब लगा-सितंबर 2012
क्या था मामला- रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया के सदस्य अमित कतरनयी ने त्रिवेदी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी कि उन्होंने अन्ना हजारे की रैली के दौरान बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स में ऐसे पर्चे लगाए थे जिसमें भारतीय संविधान का मजाक उड़ाया गया था। त्रिवेदी के खिलाफ यह आरोप भी लगाया गया था कि उन्होंने अपनी वेबसाइट पर आपत्तिजनक सामग्री डाली। इसके बाद कोर्ट ने त्रिवेदी के खिलाफ गैरजमानती वारंट जारी किया, जिसके बाद उन्हें मुंबई से गिरफ्तार कर लिया गया। बाद में महाराष्ट्र सरकार ने त्रिवेदी के खिलाफ वापस ले लिया। त्रिवेदी के मामले में खासी राजनीति भी हुई। 
छत्तीसगढ़ के डॉ. बिनायक सेन पर भी चला 'देश से द्रोह' का मामला छत्तीसगढ़ के डॉ. बिनायक सेन पर भी चला 'देश से द्रोह' का मामला
डॉ बिनायक सेन 
 
कौन- पेशे से चाइल्स स्पेशलिस्ट, एक्टिविस्ट
कब लगा- मई 2007
क्या था मामलाः छत्तीसगढ़ सरकार ने सेन पर नक्सलियों की मदद करने और छत्तीसगढ़ स्पेशल पब्लिक सिक्योरिटी एक्ट 2005 (CSPSA) के उल्लंधन के चलते देशद्रोह का मुकदमा दर्ज कराया और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। सबूत के तौर पर सेन की जेल में बंद नक्सली कमांडर नारायण सान्याल से मुलाकात और नक्सली गतिविधियों में मदद के दस्तावेज पेश किए गए। 24 दिसंबर 2010 को रायपुर के जिला जज बीपी वर्मा ने सबूतों के आधार पर बिनायक सेन, नारायण सान्याल और कोलकाता के उद्योगपति पियूष गुहा को देशद्रोह के लिए उम्रकैद की सजा सुनाई लेकिन 15 अप्रैल 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी और कहा कि सेन के खिलाफ देशद्रोह के कोई सबूत नहीं मिले। 
 
कश्मीर की आजादी की पैरवी पर अरुंधति पर केस कश्मीर की आजादी की पैरवी पर अरुंधति पर केस
अरुंधति रॉय
 
कौन हैं- मशहूर लेखिका 
कब लगा- 21 अक्टूबर 2010 
क्या था मामलाः अरुंधति पर आरोप लगा कि उन्होंने एक सेमिनार में हुर्रियत लीडर सैयद अली शाह गिलानी की मौजूदगी में कश्मीर को आजाद करने की वकालत की। दिल्ली की एक कोर्ट में सुशील पंडित ने याचिका दायर कर मामला दर्ज करने की मांग की, जिस पर कोर्ट के आदेश से दिल्ली पुलिस ने मामला दर्ज किया। एफआईआर के मुताबिक, सेमिनार में अरुंधति ने कश्मीर के संदर्भ में कहा था कि 'आजादी ही एकमात्र रास्ता।' इस सेमिनार में गिलानी के अलावा माओ नेता वारावरा राव भी दूसरे लोगों के साथ मंच पर मौजूद थे। हालांकि बाद में स्पष्ट नहीं हुआ कि दिल्ली पुलिस ने इस मामले को आगे बढ़ाया या नहीं। 
बयानवीर तोगड़िया अक्सर बढ़ाते हैं विवाद बयानवीर तोगड़िया अक्सर बढ़ाते हैं विवाद
प्रवीण तोगड़िया
 
कौन हैं- विश्व हिंदू परिषद के नेता
कब लगा-2003
क्या था मामला-विहिप के फायरब्रांड नेता प्रवीण भाई तोगड़िया यूं तो अपने तीखे बयानों से अक्सर विवादों में रहते हैं, लेकिन 2003 में उन पर देशद्रोह का मामला दर्ज हो चुका है। तत्कालीन राजस्थान सरकार ने एक सभा में दिए उनके बयान  'देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने' को देशद्रोह माना और मामला दर्ज करा दिया। अजमेर कोर्ट ने भी उन्हें जमानत देने से इनकार किया और जेल भेज दिया। इस पर खासा हंगामा मचा। बाद में उन्हें जमानत मिल गई।
 
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इंटरव्यू देना कविता को पड़ा महंगाइंटरव्यू देना कविता को पड़ा महंगा
असीम का 'देशद्रोही कार्टून'असीम का 'देशद्रोही कार्टून'
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कश्मीर की आजादी की पैरवी पर अरुंधति पर केसकश्मीर की आजादी की पैरवी पर अरुंधति पर केस
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