(फाइल फोटोः स्मृति ईरानी)
नई दिल्ली. केंद्र सरकार बीएड और एमएड कोर्स की अवधि बढ़ाकर दो साल करने जा रही है। इसी के साथ टीचर्स की ट्रेनिंग के अधिकार भी यूनिवर्सिटी को देने को देने पर विचार किया जा रहा है। यह फैसला केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री स्मृति ईरानी ने 250 से ज्यादा केंद्रीय और राज्य विश्वविद्यालयों के कुलपतियों से मुलाकात के बाद लिया है।
जानकारी के मुताबिक, सोमवार को हुई इस मुलाकात में स्मृति ने सभी कुलपतियों से इस संबंध में चर्चा की है और सभी इसके लिए सहमत भी हैं। सभी कुलपतियों ने टीचर्स ट्रेनिंग के लिए एक साल की अवधि को कम बताया है। बातचीत में भाग लेने वाले एक कुलपति का कहना है कि दोनों ही मुद्दों पर आम सहमति बनी कि टीचर्स ट्रेनिंग के लिए विश्वविद्यालयों को अधिकार मिलने चाहिए और दोनों पाठ्यक्रमों की अवधि बढ़ाई जानी चाहिए।
नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजेकुशन (एनसीटीई) की पूनम बत्रा कमेटी ने बीती जुलाई में ही कहा था कि कोर्स की अवधि बढ़ाने का कार्य शैक्षणिक वर्ष 2015-16 के साथ शुरुआत और 2019-20 में समाप्त होने वाले पांच वर्षों में चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाना चाहिए। कमेटी ने शिक्षकों की ट्रेनिंग में अन्य विषयों जैसे सामाजिक विज्ञान, विज्ञान और मानविकी (ह्यूमनिटीज) को भी शामिल करने का सुझाव दिया था। कुलपतियों से मुलाकात के दौरान मानव संसाधन मंत्री ने शिक्षकों की ट्रेनिंग को उच्च शिक्षा से जोड़ने की बात भी कही। शिक्षकों की ट्रेनिंग इन्फॉर्मेशन और कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी (आईसीटी) के तहत कराने की बात भी इस बैठक में की गई।
वर्मा कमेटी ने भी दिया था सुझाव-
शिक्षकों की ट्रेनिंग में रिफॉर्म के सुझाव सबसे पहले 2012 में जस्टिस वर्मा कमीशन ने भी दिए थे। बता दें कि प्रधानमंत्री
नरेंद्र मोदी ने
शिक्षक दिवस पर अपने भाषण में शिक्षकों से आईसीटी के तहत ट्रेनिंग लेने की बात कही थी ताकि वें छात्रों को बेहतर ढंग से समझा पाएं। मंत्रालय की यह कोशिश मोदी की बात से जोड़कर देखी जा रही है।