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66 सालों में बदले दुनिया के बोल: भारत के 7 वंडर ने चर्चिल और केनेडी को साबित किया गलत

8 वर्ष पहले
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नई दिल्ली. आज देश गणतंत्र दिवस (रिपब्लिक डे) मना रहा है। आज का दिन हमारे लिए एक लोकतांत्रिक देश के रूप में अपने गौरव से भरे इतिहास को देखने-समझने और सुनहरे भविष्य के सपने संजोने का एक मौका है। सूचना और तकनीक के इस युग में भारत दुनिया की 'नॉलेज कैपिटल' के रूप में अपनी पहचान मुकम्मल करता जा रहा है। भारत में संविधान लागू होने के 64 साल बाद हमारी तरक्की का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 2030 तक हम दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था भी बन सकते हैं। लेकिन वक्त भारत के लिए हमेशा इतना अच्छा नहीं रहा है। 1947 में जब देश आज़ाद हो रहा था तो दुनिया के कई अहम देशों ने भारत पर ताने कसे थे। कई मशहूर हस्तियों ने आज़ाद मुल्क के तौर पर भारत के भविष्य को अंधेरों और नाकामियों से भरा बताया था। लेकिन आज भारत ने न सिर्फ उन आशंकाओं को पूरी तरह से झुठला दिया है बल्कि दुनिया को कई मायनों में तरक्की का पाठ भी पढ़ाने लगा है। हां, यह जरूर है कि 1.25 अरब की आबादी वाले इस देश में आज भी कई तरह की चुनौतियां हैं, लेकिन हमें भरोसा रखना चाहिए कि आने वाले कुछ दशकों में भारत इन्हें भी दूर कर लेगा। एक स्वतंत्र देश के रूप में जन्म लेने से लेकर शुरुआत के दो-ढाई दशकों तक दुनिया के कई बड़े नेताओं ने भारत के एक देश के रूप में बचे रहने पर शक जताया था। आज कुछ ऐसे ही नेताओं के तब के बयानों और उनके ही देश के आज के नेताओं के बयानों को देखने से साफ हो जाता है कि भारत ने 66 सालों में कितना लंबा सफर तय किया है।
ब्रिटेन से भारत के रिश्ते: चर्चिल और डेविड कैमरन
''आवारा, नीच और डकैतों के हाथों में सत्ता चली जाएगी; सभी भारतीय नेता बेहद कम क्षमता वाले कूड़ा करकट लोग होंगे...वे सत्ता के लिए आपस में लड़ेंगे और राजनीतिक झगड़े में भारत खो जाएगा।''
-चर्चिल (ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री)
बयान के मायने
विंस्टन चर्चिल ने यह बयान तब दिया था जब ब्रिटेन के तत्कालीन प्रधानमंत्री क्लेमेंट एटली ने ब्रिटिश संसद में भारत की आज़ादी का एक्ट विचार के लिए रखा गया था। चर्चिल औपनिवेशक मानसिकता के बड़े कद के नेता थे। उन्हें भारत के भविष्य को लेकर कई आशंकाएं थीं। वे गांधी और उनकी आजादी पाने की अहिंसक लड़ाई के तरीके को भी पसंद नहीं करते थे। चर्चिल के बयान का मतलब था कि भारत अपने ही अंतर्विरोधों और कमियों के चलते बहुत जल्द नाकाम देश बन जाएगा, जिसका दुनिया में कोई भविष्य नहीं होगा।
''भारत की प्रगति इस शताब्दी की सबसे महान गाथाओं में से एक होगी। भारतीय लोकतंत्र की जीवंतता, उसकी विविधता और भारतीय अर्थव्यवस्था की ताकत अद्भुत है। 2030 तक भारत दुनिया की 3 सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देशों में से एक होगा।''
-डेविड कैमरन (ब्रिटेन के प्रधानमंत्री)
बयान के मायने
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने पिछले साल भारत के दौरे पर यह बात कही थी। डेविड कैमरन अपनी यात्रा के दौरान अमृतसर के जलियांवाला बाग भी गए थे। कैमरन ने वहां शहीदों की याद में बने स्मारक के सामने घुटने टेक कर उन्हें श्रद्धांजलि दी थी। जलियांवाला बाग भारत की आज़ादी की लड़ाई में बहुत अहमियत रखता है। 13 अप्रैल, 1919 को बैशाखी के दिन जनरल डायर की अगुवाई में ब्रिटिश सैनिकों ने जलियांवाला बाग में निहत्थे और बेकसूर भारतीयों पर 1600 राउंड गोलियां चलाई थीं। इसमें सैकड़ों भारतीय शहीद हो गए थे। एक देश के रूप में भारत को लेकर ब्रिटेन के दो बड़े नेताओं के बयानों के फर्क से भारत की अद्भुत यात्रा का पता चलता है।
काश! चर्चिल यह सब देखने के लिए जीवित होते।
(तस्वीर: जलियांवाला बाग में घुटने टेक कर श्रद्धांजलि देते डेविड कैमरन)