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पाक से फिलहाल मुश्किल सवाल नहीं करेगा भारत

8 वर्ष पहले
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नई दिल्ली. पाकिस्तान में नई चुनी हुई सरकार के गठन की प्रक्रियाओं के बीच भारत ने फिलहाल द्विपक्षीय रिश्तों से जुड़े कड़े सवाल नहीं करने का फैसला किया है। वजह यह है कि चुनाव में बहुमत हासिल करने वाली पीएमएल-एन के प्रमुख नवाज शरीफ ने स्वयं दोनों देश के बीच सौहार्द कायम करने की दिशा में कदम बढ़ाने का इरादा व्यक्त किया है। ऐसे में अपनी ओर से शुरुआत में ही दबाव बनाकर भारत नहीं चाहता है कि पाक की नई चुनी हुई सरकार से द्वंद्व शुरू हो जाए।
भारत और पाक रिश्तों में नए-नए ब्रेकर आते रहे हैं। बीते वर्षों में मुंबई हमला और इस साल दो भारतीय जवानों के सिर काटने के अलावा चमेल सिंह और सरबजीत सिंह के मामले ऐसे हैं, जिसने दोनों देशों के बीच कड़वाहट की खाई चौड़ी की है। इन मामलों की वजह से भारत की ओर से पाक से सभी रिश्ते तोडऩे जैसे कदमों तक बात पहुंच चुकी है। इतना ही नहीं, एक वर्ग यह भी चाहता है कि पाक से सीधे युद्ध कर मामले का निपटारा किया जाए। भारत ने लगातार अपना पक्ष यह बनाया हुआ है कि पाक रिश्तों को सामान्य करने के लिए मुंबई हमले के आरोपियों के आवाज के सैंपल दे। इसके साजिशकर्ता हाफिज सईद को सजा दे। पाक में आतंकी कैंपों को बंद करे। घुसपैठ पर प्रभावी रोक लगाए। लेकिन पाक सेना और वहां की सरकार की ओर से नकारात्मक जवाब ही मिले हैं।
विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि चुनी हुई सरकार के आने से द्विपक्षीय रिश्ते मजबूत होने की आस जगी है। नवाज शरीफ ने इसके संकेत दिए हैं। ऐसे में हम चाहते हैं कि इस दिशा में उनके कदमों का इंतजार किया जाए। यही वजह है कि फिलहाल हम उनकी ताजपोशी और भारत को लेकर उनकी नीति का इंतजार करना चाहते हैं। जब वह स्वयं मैत्री की बात कर रहे हैं तो उनसे मुंबई हमले, चमेल सिंह और सरबजीत सिंह मामले पर सवाल-जवाब करना और अन्य मुश्किल मसलों पर घेरना थोड़ा जल्दबाजी होगी। इस अधिकारी ने कहा, ‘हमारा पक्ष पहले से साफ है। अगर वे कदम बढ़ाते हैं तो बेहतर होगा। यह भारत नहीं पाक के भी आर्थिक-राजनीतिक-सामाजिक हित में है। और शायद यही वजह है कि नवाज शरीफ ने भारत के साथ मैत्री की वकालत की है। उन्हें पता है कि टकराव से दोनों का नुकसान है।’ इस अधिकारी ने कहा कि यह सही है कि उनके समय ही करगिल में पाक का हमला हुआ। लेकिन उसी समय तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी बस लेकर लाहौर तक गए।
प्रधानमंत्री के पाक दौरे को लेकर नकारात्मक नहीं है विदेश मंत्रालय
पाकिस्तान के नए प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की ताजपोशी के कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के शिरकत करने में विदेश मंत्रालय का एक वर्ग कुछ भी नकारात्मक नहीं देखता है। मनमोहन सिंह को इसमें शामिल होने का न्यौता दिया गया है। हालांकि विदेश मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि यह खबर मात्र मीडिया में है, अभी कोई ‘औपचारिक निमंत्रण’ नहीं मिला है। एक अधिकारी ने कहा, ‘अगर विदेश नीति के लिहाज से देखा जाए तो इसमें कुछ भी नकारात्मक नहीं है, बल्कि हमारे पक्ष में है। इससे यह संदेश जाएगा कि पाक के तमाम नकारात्मक कदमों के बाद भी भारत वैश्विक शांति के तहत वहां जाने को तैयार है।’ इस अधिकारी ने कहा, ‘इसके अलावा ताजपोशी समारोह में जाना कूटनीतिक स्तर पर इस मायने में भी सही है कि यह ऐसा समय होगा जब कोई पाक से किसी भी तरह के जवाबी कदम की त्वरित उम्मीद नहीं कर सकता है। पाक की ओर से इसके बाद अगर कोई नकारात्मक कदम उठता है तो उसे वैश्विक स्तर पर निंदा का पात्र होना पड़ेगा।’ इधर, राजनीतिक सूत्र भी इसे सरकार के लिए मौजूदा राजनीतिक स्थिति से निपटने का सही अवसर मानते हैं। उनका कहना है कि अगर प्रधानमंत्री वहां जाते हैं तो मीडिया का ध्यान ‘कोलगेट-रेलगेट’ से हटकर इस यात्रा पर केंद्रीत हो जाएगा। सरकार को इससे राहत मिलेगी। वहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत को लेकर चर्चा बढ़ेगी।