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देखें तस्वीरें- इंदिरा पर्यावरण भवन, देश की पहली नेट जीरो एनर्जी बिल्डिंग / देखें तस्वीरें- इंदिरा पर्यावरण भवन, देश की पहली नेट जीरो एनर्जी बिल्डिंग

एक साल पहले तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह ने इसका शिलान्यास किया था, जो अब जाकर पूरा हुआ था। इस 7 मंजिला इमारत तकरीबन 32 हजार वर्ग मीटर के क्षेत्र में बनी है।

Nov 14, 2014, 12:32 AM IST
इंदिरा पर्यावरण भवन, देश की पहली नेट जीरो एनर्जी बिल्डिंग
(फोटोः इंदिरा पर्यावरण भवन)
नई दिल्ली. इंदिरा पर्यावरण भवन देश की ऐसी पहली और अकेली इमारत है जो पूर्ण रूप से प्राकृतिक ऊर्जा पर निर्भर है। इस इमारत की सबसे बड़ी खासियत यह है कि ऑफिस के कामकाज को बेहतर ढंग से चलाने के लिए बाहरी ऊर्जा (बिजली) की जरूरत नहीं है। इसकी छत पर देश का सबसे बड़ा सोलर सिस्टम लगा है। एक साल पहले तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह ने इसका शिलान्यास किया था, जो अब जाकर पूरा हुआ था। इस 7 मंजिला इमारत तकरीबन 32 हजार वर्ग मीटर के क्षेत्र में बनी है। इस इमारत की लागत 209 करोड़ रुपए आई है। पूरी तरह भूकंपरोधी इस इमारत के एक चौथाई हिस्से में पेड़ रोपे गए हैं और विशेष रूप से घास भी उगाई है।
इमारत में जूट, बांस का इस्तेमाल,
- इस इमारत में पीक आवर में एनर्जी की मांग 930 किलोवाट है।
- इस इमारत को इस तरह से डिजायन किया गया है ताकि दिन के प्रकाश का 75 फीसदी इस्तेमाल ऊर्जा खपत में कमी लाने में सहायक हो सके।
- यहां पैदा होने वाली बिजली को एनडीएमसी के स्थानीय ग्रिड में भेजा जाएगा।
- 40 फीसदी ऊर्जा की बचत एयरकंडीशन में चील्ड बीम का इस्तेमाल कर बचाया जा रहा है। यह एक अलग तकनीक है जिसमें कूलिंग की प्रक्रिया पारंपरिक तरीके से नहीं करके नए तकनीक से की जाती है।
- इस इमारत के निर्माण में पूरा ग्रीन मटेरियल (राख से बने ईंट, रिसाइकल की गई वस्तुओं से बने सामान) लगा है।
- इसे ऐसे डिजाइन किया गया है कि विकलांग व्यक्ति भी आसानी से पहुंच सके।
- इस इमारत में जूट और बांस का इस्तेमाल भी किया गया है।
- UPVC की खिड़कियां डबल ग्लास से सील की गई है। कैल्शियम सिलिकेट के बने सीलिंग टाइल्स लगे हैं।
- इस इमारत के आसपास से खास तौर से घास उगाई गई है। खासतौर से बनी ग्रास पेवर ब्लाक्स रोड पर लगाए गए हैं।
- इमारत में पानी का उपयोग भी बेहद कम होता है। कम मात्रा में निकलने वाले पानी को सिवेज ट्रीटमेंट प्लांट की मदद से रिसाइकल किया जाता है।
- यहां के लैंडस्केपिंग भी इस तरह की गई है, जिससे पानी की खपत को कम किया जा सके।
- इस इमारत को ग्रीन रेटिंग फॉर इंटीग्रेटेड हैबिटेट असेसमेंट (GRIHA) से 5 स्टार रेटिंग मिली है।
क्या है जीरो नेट एनर्जी-
जीरो नेट एनर्जी बिल्डिंग या नेट जीरो बिल्डिंग का मतलब यह है कि साल भर के दौरान यहां पर जितनी ऊर्जा की आवश्यकता होगी वह यहां सोलर सिस्टम के जरिए उत्पादित रिन्युएबल इनर्जी के करीब बराबर होगी। यूरोप के कई देशों में इसे कार्बन फुट प्रिंट कम करने के लिए इस्तेमाल में लाया जाता है ताकि वातावरण स्वच्छ रह सके।
इंदिरा पर्यावरण भवन, देश की पहली नेट जीरो एनर्जी बिल्डिंग
पर्यावरण भवन की मेन लॉबी
इंदिरा पर्यावरण भवन, देश की पहली नेट जीरो एनर्जी बिल्डिंग
ऐसा दिखता है पर्यावरण भवन।
इंदिरा पर्यावरण भवन, देश की पहली नेट जीरो एनर्जी बिल्डिंग
इमारत की छत, जहां से आती रोशनी ऊर्जा खपत को बेहद कम कर देती है।
इंदिरा पर्यावरण भवन, देश की पहली नेट जीरो एनर्जी बिल्डिंग
इमारत की खिड़कियों में डबल ग्लास लगाए गए हैं, जो सूर्य की रोशनी को सोखकर ऊर्जा में तब्दील करते हैं। 
इंदिरा पर्यावरण भवन, देश की पहली नेट जीरो एनर्जी बिल्डिंग
इमारत की छत पर देश का सबसे बड़ा सोलर प्लांट लगाया गया है।
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इमारत को ग्रीन रेटिंग फॉर इंटीग्रेटेड हैबिटेट असेसमेंट (GRIHA) से 5 स्टार रेटिंग मिली है।
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ऐसा है पर्यावरण भवन।
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इंदिरा पर्यावरण भवन, देश की पहली नेट जीरो एनर्जी बिल्डिंग
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