(फाइल फोटोः तत्कालीन पीएम पीवी नरसिंहराव के साथ डॉ. मनमोहन सिंह।)
नेशनल डेस्क. डॉ मनमोहन सिंह, एक अर्थशास्त्री के रूप में जितनी उनकी शोहरत है, उतना ही उनका नाम बीते 10 सालों में प्रधानमंत्री रहते हुए खराब हुआ। 2004 में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने जब उन्हें अपनी जगह पीएम बनाया, तो सबने कहा कि वे इस पद पर डमी पीएम के रूप में ही रहेंगे, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। मनमोहन के साथ उनकी अर्थशास्त्री की छवि हमेशा साथ रही। हालांकि कोयला घोटाला और 2जी घोटाले में उनकी छवि को धक्का भी लगा, लेकिन सीधे सहभागिता न होने के कारण उन्हें सिर्फ आलोचना ही झेलनी पड़ी। मनमोहन 82 साल के हो गए हैं। प्रधानमंत्री पद छोड़ने के बाद वे अभी भी राज्यसभा सांसद हैं और अपने घर में आज भी मेहमानों से वैसे ही मिलते हैं, जैसे पहले मिलते थे।
27 सितंबर के दिन 1932 में अविभाजित भारत (गाह पंजाब, अब पाकिस्तान) में सिख परिवार में जन्मे मनमोहन सिंह को मां अमृत कौर का प्यार काफी मिला। उनकी मौत तब हो गई थी, जब मनमोहन किशोर थे। बाद वे उन्हें उनकी दादी ने पाला। बंटवारे के बाद उनका परिवार अमृतसर आ गया और मनमोहन हिंदू कॉलेज में पढ़ने लगे। पढ़ाई में हमेशा फर्स्ट डिवीजन आने वाले मनमोहन को सबसे काबिल और पढ़े-लिखे भारतीय राजनीतिज्ञ के तौर पर यूं ही नहीं पहचाना जाता। उनका बायोडाटा भारत ही नहीं, दुनिया के कई राष्ट्राध्यक्षों को चुनौती देता है।
ऐसी बहुत सी बातें हैं, जो मनमोहन की जिंदगी से जुड़ी हैं, लेकिन एक बात, जो हमेशा उनके साथ चलती है, वह है उन्हें मिलने वाला सम्मान. मनमोहन किसी भी पद पर रहे हों, प्रतिद्वंदियों ने भी हमेशा उन्हें आदर और सम्मान दिया। अमेरिकी राष्ट्रपति
बराक ओबामा ने तो मनमोहन के लिए व्हाइट हाउस का प्रोटोकॉल तक तोड़ दिया था, तो
नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने के अगले ही दिन उनसे उनके घर जाकर मुलाकात की थी। मनमोहन की छवि एक ऐसे अर्थशास्त्री राजनेता की रही है, जो न चाहते हुए भी विवादों में रहा। स्वभाव से शर्मीले, हमेशा चुपचाप रहकर काम करने में भरोसा रखने वाले मनमोहन का एकमात्र शौक है, पढ़ना और पढ़ते जाना।
वित्त मंत्री बने, तो सब चौंक गए
1991 में मनमोहन सिंह को वित्त मंत्री बनाकर तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिंहराव ने देश ही नहीं, दुनिया को चौंका दिया था। यही मनमोहन के राजनीति में प्रवेश का दरवाजा बना। उस वक्त दुनिया भर में आर्थिक मंदी का दौर था। मनमोहन की नीतियों के चलते भारत पर इसका असर तक नहीं पड़ा और यहीं से उनकी पहचान अर्थशास्त्री राजनीतिज्ञ के तौर पर बन गई।
आगे पढ़ें मनमोहन के जन्मदिन पर उनसे जुड़े कुछ ऐसे ही रोचक तथ्य