नई दिल्ली. पोर्न वेबसाइट्स को भारत में ब्लॉक करने के मामले में इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स (ISPs) ने अपने हाथ खड़े कर दिए हैं। ISPs ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में कहा कि वे दूरसंचार मंत्रालय या कोर्ट के आदेश के बिना पोर्न वेबसाइट्स पर रोक नहीं लगा सकते। उन्होंने यह भी कहा कि यह रोक कानूनी, व्यावहारिक और तकनीकी दृष्टि से संभव नहीं है। ISPs का यह भी कहना है कि पोर्न साइट्स पर मौजूद आपत्तिजनक सामग्री के लिए उन्हें जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। वहीं ISPs ने यह भी कहा कि पोर्नोग्राफिक शब्द को परिभाषित करने की जरूरत है क्योंकि इस शब्द का दायरा स्पष्ट नहीं है।
भारत में सभी पोर्न वेबसाइट्स पर रोक लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में इंदौर निवासी एडवोकेट कमलेश वासवानी ने जनहित याचिका दायर की थी। याचिका में कहा गया है कि महिलाओं के खिलाफ होने वाले ज्यादातर अपराध की एक वजह ऐसी साइट्स भी हैं।
आगे पढ़ें: कोर्ट ने दिया तीन सप्ताह का समय