फोटो: श्रीनगर में एक शख्स को बचाता सेना का जवान।
जम्मू/श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में बाढ़ के कहर के बाद जैसे-जैसे जलस्तर घट रहा है, तबाही के निशान दिख रहे हैं और दिल को झकझोर देने वाले कई वाकये सामने आ रहे हैं। कहीं कोई लड़की शादी के जोड़े में ही मौत के आगोश में चली गई तो किसी के हाथों पर लगी मेहंदी अपने पति के इंतजार में फीकी पड़ रही है। एक महिला के शव को पानी से बाहर निकाला गया तो उसकी पीठ पर उसके बेटे का शव बंधा हुआ था। एक दंपती बाढ़ के बाद अपने एक मात्र नवजात बच्चे को घर में छोड़कर चला गया। इस बीच, लोगों की बचाने के लिए अपनी जान दांव पर लगाने के कई मामले भी सामने आए हैं। श्रीनगर के एक पत्रकार ने 300 से ज्यादा लोगों की जान बचाई।
मेहंदी की रात से पति गायब
श्रीनगर के एक पत्रकार सुजात बुखारी ने कहा, "जवाहर नगर के एक युवा की शादी होनी थी, लेकिन वह मेहंदी की रात (शादी के एक दिन पहले) से ही लापता है। उसकी पत्नी के हाथों पर अभी भी मेहंदी लगी हुई है।" सनात नगर इलाका स्थित एक राहत कैंप में मौजूद एक बैंकर बशरात अहमद ने कहा, "बाढ़ में बचाए जाने के बाद जब एक दंपती मिला तो उनके बीच लड़ाई शुरू हो गई। दोनों एक-दूसरे पर अपने एकमात्र नवजात बच्चे को छोड़कर जाने का आरोप लगा रहे थे। दोनों के बीच की लड़ाई देखना बहुत दुखद था।"
महिला के शव पर बंधा था बच्चे का शव
बशरात ने कहा कि राहत कैंप में कई और बातें सुननी में आ रही थीं। मसलन, कैसे शादी का जोड़ा पहने एक लड़की की मौत हो चुकी थी और जब ग्रामीणों ने पानी से एक महिला का शव बाहर निकाला तो उसकी पीठ पर उसके बेटे का शव बंधा हुआ था। कुलगाम में ग्रामीणों ने किसी तरह एक बच्चे को बचा लिया, लेकिन कई दिन बीत जाने के बावजूद वह बोल पाने में समर्थ नहीं है। एक राहतकर्मी कैसर अहमद ने कहा, "मैं हर रोज लाशों को तैरते हुए देखता हूं। कई घर पूरी तरह तबाह हो चुके हैं। पानी घटने के बाद मरने वालों की तादाद और बढ़ेगी।"
पिता की दवाई के लिए लगाई जान की बाजी
सोलिना इलाके में एक शख्स ने डायबिटीज से पीड़ित अपने बीमार पिता के लिए इंसुलिन लाने की खातिर जान की बाजी लगा दी। पिता को छत पर लिटाकर वह खुद बाढ़ के पानी में तैरकर दवाई लेने गया।
पत्रकार ने 300 लोगों को बचायाश्रीनगर के पत्रकार रिफात अब्दुल्ला ने अपनी जान की परवाह नहीं करते हुए 300 से ज्यादा लोगों की जान बचाई। शहर के राजबाग इलाके में जब बाढ़ का पानी घुस गया था, तो अब्दुल्ला अपने घर की चौथी मंजिल पर थे। चारों तरफ चीख-पुकार मची थी और लोग मदद के लिए गुहार लगा रहे थे। जब जलस्तर दूसरी मंजिल तक पहुंच गया तो लोगों की मदद के लिए अब्दुल्ला ने अधिकारियों को फोन मिलाया, लेकिन
मोबाइल नेटवर्क ठप हो चुका था।
अब्दुल्ला ने दूसरा कोई विकल्प नहीं देखकर खुद ही लोगों को बचाने का फैसला किया। वह पानी में कूद पड़े और किसी तरह एक बोट का इंतजाम करने में कामयाब रहे। इसके बाद कुछ और वॉलंटियर्स को जुटाकर उन्होंने बाकी लोगों को बचाने का काम शुरू किया। अब्दुल्ला ने बताया कि उन्होंने सैकड़ों लोगों की जान बचाई। उनके मुताबिक, उन्होंने खुद कम से कम 300 लोगों को सुरक्षित जगह तक पहुंचाया।
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