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शाही जिंदगी की आदी हैं जयललिता: गोद लिए बेटे की शादी पर पानी की तरह बहाया था पैसा

7 वर्ष पहले
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फाइल फोटो: तमिलनाडु के एक गांव में जयललिता
नई दिल्‍ली. आय से ज्यादा संपत्ति रखने के मामले में सौ करोड़ रुपए जुर्माना और चार साल कैद की सजा पाईं जयललिता अपनी शाही जीवनशैली के लिए जानी जाती हैं। वे किस तरह की जिंदगी जीने की आदी रही हैं, इस बात का अंदाजा इसी तथ्य से लगाया जा सकता है कि 1996 में जब जयललिता के घर पर छापा मारा गया था तब 896 किलो चांदी, 28 किलो सोना, 10 हजार साड़ियां, 750 जूते और 51 घड़ियां बरामद हुई थीं। प्रशासक के रूप में भी उनकी इमेज काफी सख्‍त रही है। 2001 में सत्ता में आने के बाद जब सरकारी कर्मचारियों ने हड़ताल कर दी थी, तो उन्होंने एक साथ दो लाख कर्मचारियों को ही बर्खास्त कर दिया था। जयललिता का कद एआईएडीएमके में इतना बड़ा है कि आज तक पार्टी में दूसरी पंक्ति के नेता के रूप में कोई नहीं उभर पाया। उनकी पार्टी के सांसद जेब में उनकी तस्‍वीर रख कर चलते हैं। लेकिन, अब चार साल जेल में और दस साल चुनावी राजनीति से दूर रहने की मजबूरी के चलते उनका यह जलवा बरकरार रह पाएगा?
अंग्रेजी अखबार 'द हिंदू' के मैनेजिंग एडिटर जयंत वासुदेवन की राय:
जयललिता के खिलाफ आए इस फैसले से तमिलनाडु में उनकी पार्टी की राजनीति पर निकट भविष्‍य में कोई बुरा असर पड़ने की आशंका नहीं है। चुनाव अभी दो साल दूर हैं और जयललिता सरकार व पार्टी चलाने के लिए 'रामचरितमानस' के राम की तरह 'भरत' का चयन कर सत्‍ता पर अपनी पकड़ बनाए रखेंगी। हालांकि, यह 'भरत' कौन होगा, यह बताना मुश्किल है।जयललिता हमेशा चौंकाने वाला फैसला करती हैं। इसलिए किसी नाम के बारे में कयास नहीं लगाया जा सकता। जहां तक अन्‍य पार्टियों का सवाल है तो डीएमके दो साल में इस फैसले को मुद्दा बना कर अपना जनाधार मजबूत करने की कोशिश कर सकती है। लेकिन, कांग्रेस के लिए कोई संभावना नहीं दिखाई देती, क्‍योंकि उसकी जड़ मिट गई है। भाजपा की जड़ राज्‍य में उग तो रही है, लेकिन वह तात्‍कालिक तौर पर स्थिति का फायदा उठाने के लिए तैयार नहीं है। इसलिए भाजपा की राजनीति भी राज्‍य में अपनी रफ्तार से ही चलेगी। केंद्रीय स्‍तर पर भी भाजपा इस स्थिति का कोई फायदा नहीं उठा सकेगी, क्‍योंकि जिस तरह अभी जयललिता रिमोट कंट्रोल से अपने सांसदों को संचालित करती हैं, उसी तरह उनके द्वारा चुना गया नेता आगे करता रहेगा। प्रकारांतर से जयललिता भी सीन में बनी रहेंगी। इसलिए स्थिति जस की तस ही बनी रहेगी।

राजनीतिक विश्‍लेषक अरविंद मोहन का विश्‍लेषण
जयललिता और उनकी करीबियों के खिलाफ आए फैसले से तमिलनाडु की राजनीति में कुछ बदलाव दिखने को मिल सकते हैं। जयललिता ने जिस तरह से लगातार पिछले कुछ चुनाव शानदार ढंग से जीते हैं, वैसे में उन्‍हें खारिज कर देना तो जल्‍दबाजी होगी, लेकिन एआईएडीएमके की एकजुटता बनाए रखना और अपना नेतृत्‍व अभी की ही तरह मजबूत बनाए रखना अब बड़ी चुनौती होगी। खास कर तब जब जयललिता के साथ उनकी करीबी शशिकला को भी सजा हो गई है। इस मामले में उन्‍हें सरकार द्वारा शुरू की गई जनहित योजनाओं को थोड़ा लाभ जरूर मिल सकता है। उन्‍होंने जनहित की योजनाओं पर अच्‍छे से अमल करके अपने और पार्टी के लिए बड़ा जनाधार विकसित किया है। इस जनाधार को लंबे समय तक बनाए रखना पार्टी के लिए चुनौती होगी। पार्टी के लिए राहत की बात यह है कि डीएमके के लिए इस जनाधार में सेंध लगाना मौजूदा हालात के मद्देनजर आसान नहीं होगा, क्‍योंकि डीएमके में तीन खेमे बने हुए हैं और इनकी गुटबाजी खत्‍म होने के फिलहाल कोई आसार भी नहीं दिख रहे हैं। कांग्रेस, पीएमके व अन्‍य छोटी पार्टियां अगर इस स्थिति का कुछ फायदा उठाना चाहेंगी तो उन्‍हें एक साथ आना होगा। भाजपा के लिए अपनी जमीन मजबूत करना थोड़ा आसान हो सकता है, क्‍योंकि उसके पास कैडर हैं, संगठन है और केंद्र की सत्‍ता भी है।
कानूनी रूप से देखें तो चार साल जेल के साथ-साथ सौ करोड़ रुपए का जुर्माना लगा देना बड़ा संदेश देने वाला फैसला है। करीब 64 करेाड़ की संपत्ति के मामले में सौ करोड़ का जुर्माना अपने आप में बड़ी सजा है। यह बड़े नेताओं के भ्रष्‍टाचार के मामले में अदालतों का सख्‍त रुख दर्शाता है। लाल प्रसाद यादवू, ओम प्रकाश चौटाला जैसे बड़े नेताओं के बाद अब जयललिता के मामले में आए इस फैसले का संदेश यह भी है कि अब भ्रष्‍टाचार करने वाले बड़े नेता भी कानून की मार खा रहे हैं। यह संदेश भ्रष्‍टाचार कम करने में मददगार जरूर होगा।
अम्‍मा ब्रांड को झटका
अदालत के इस फैसले से जयललिता के समर्थकों को झटका लगा है। तमिलनाडु में 'अम्मा' ब्रांड से कई तरह की चीजें सस्ती दरों पर मुहैया कराने वाली जयललिता की कई योजनाओं पर ग्रहण लग सकता है। जल्द ही शुरू होने वाला अम्मा सिनेमा, सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को अम्मा स्कूल बैग और अम्मा चाय जैसी योजनाएं शामिल हैं। अम्मा सिनेमा योजना के तहत लोगों को सस्ती दरों पर फिल्मों के टिकट बेचे जाएंगे।
जयललिता इन योजनाओं को लेकर कितनी गंभीर रही हैं, इस बात का अंदाजा इस तथ्य से लगाया जा सकता है कि शनिवार को कोर्ट का फैसला आने से ठीक एक दिन पहले यानी शुक्रवार को ही जयललिता ने तमिलनाडु की जनता के लिए सस्ती दरों पर सीमेंट देने की योजना शुरू की थी। इस योजना के तहत सीमेंट की एक बोरी 190 रुपए में दी जा रही है। बीते तीन सालों में जयललिता ने ब्रांड अम्मा के तहत अम्मा रसोई, अम्मा फार्मेसी और अम्मा मिनरल वाटर जैसी कई योजनाएं शुरू की गई हैं। अम्मा रसोई में एक रुपए में इडली और 20 रुपए से कम में दो लोगों का खाना मिल जाता है। अम्मा फार्मेसी के तहत तमिलनाडु में 100 दवा की दुकानों पर सस्ती दरों पर दवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। 10 रुपए की कीमत में अम्मा मिनरल वाटर की एक लीटर की बोतल बेची जा रही है। यही नहीं, अम्मा नमक भी सस्ती दरों पर बेचा जा रहा है।
आगे पढ़ें- 1982 से अब तक के जयललिता के राजनीतिक सफर के बारे में