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सुप्रीम कोर्ट से भी राहत नहीं: टैक्‍स रिटर्न नहीं भरना जयललिता को पड़ा भारी, चलेगा केस

7 वर्ष पहले
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नई दिल्ली. इनकम टैक्स रिटर्न (आईटीआर) नहीं भरने के मामले में तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता को झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट से इस मामले में जयललिता को कोई राहत नहीं मिली और अब उन्‍हें मुकदमे का सामना करना होगा। जस्टिस केएस राधाकृष्णन की पीठ ने निचली अदालत को मामले की सुनवाई 4 महीने में खत्म के निर्देश दिए हैं।

क्या है मामला

जयललिता ने शशिकला के साथ मिलकर शशि इंटरप्राइजेज नाम की कंपनी बनाई थी, लेकिन न तो कंपनी और न ही इसके साझेदारों ने साल 1991-92,1992-93 और 1993-94 का आयकर भरा।

आईटीआर नहीं चुकाने के आरोपों का आर्थिक अपराध न्‍यायालय में जयललिता ने यह कहते हुए खंडन किया था कि उन्हें इस कंपनी से किसी तरह की कोई आय नहीं हुई, इसलिए वह टैक्स के दायरे में नहीं आती हैं। लिहाजा, इनकम टैक्स नहीं चुकाने का उन पर कोई आरोप नहीं बनता और आईटीआर दाखिल नहीं करना कोई अपराध भी नहीं है। आर्थिक अपराध न्यायालय ने उनकी यह अपील खारिज कर दी और फैसला दिया कि जयललिता और शशिकला के खिलाफ मुकदमा चलेगा। इस फैसले के खिलाफ की गई अपील हाई कोर्ट में भी खारिज हो गई। हाईकोर्ट ने भी कहा कि आर्थिक अपराध न्‍यायालय का फैसला सही है। तब मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा। यहां जज ने हाईकोर्ट के आदेश में दखल देने से इनकार कर दिया।

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