चेन्नई. द्रविड़ मुनेत्र कषगम (डीएमके) में राजनीतिक विरासत पर कब्जे को लेकर चल रहा संघर्ष शुक्रवार को नए मोड़ पर आ गया। डीएमके ने पार्टी प्रमुख एम करुणानिधि के 62 वर्षीय बड़े पुत्र एमके अलागिरी को अनुशासनहीनता के आरोप में पार्टी के सभी पदों और सदस्यता से निलंबित कर दिया है।
पार्टी पर नियंत्रण के लिए अलागिरी का अपने छोटे भाई एमके स्टालिन के साथ लंबे समय से संघर्ष चल रहा था। हालांकि, 89-वर्षीय करुणानिधि पहले कई बार स्पष्ट कर चुके हैं कि स्टालिन ही उनके उत्तराधिकारी होंगे।
कुछ दिनों पहले ही करुणानिधि ने अलागिरी को डीएमडीके के साथ चुनावी गठजोड़ के बारे में दिए गए बयान के लिए फटकार लगाई थी साथ ही उन्हें हद में रहने की नसीहत देते हुए कहा था यदि वह पार्टी को नुकसान पहुंचाने का काम करेंगे तो उन्हें बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है।
यह भी है निलंबन का कारण
अलागिरी के निलंबन के बाद डीएमके ने बयान जारी किया। इसमें कहा गया है कि अलागिरी के खिलाफ इसलिए कार्रवाई की गई है, क्योंकि वे पार्टी के खिलाफ सार्वजनिक तौर पर बातें कर रहे थे। अलागिरी ने डीएमके के विजयकांत की पार्टी डीएमडीके के साथ गठबंधन की योजना को लेकर सवाल उठाए थे।
पिता और भाई की थी अलग राय
अलागिरी के पिता करुणानिधि और उनके भाई स्टालिन डीएमडीके के साथ गठजोड़ करना चाहते हैं, ताकि वो जयललिता को चुनौती दें सकें। अलागिरी ने बताया था कि विजयकांत गंभीर नेता नहीं हैं। ऐसे में उनके साथ पार्टी का समर्थन ठीक नहीं होगा।
पहले भी दी थी चेतावनी
गुरुवार को पार्टी ने मदुरै में अलागिरी के पांच समर्थकों को निलंबित कर दिया था। उन पर पार्टी की छवि खराब करने वाले पोस्टर दीवारों पर लगाने का आरोप था। पहले भी करुणानिधि ने अलागिरी को चेतावनी दी थी कि या तो वह पार्टी की नीतियों के साथ चलें या निष्कासन के लिए तैयार रहें।
लोकसभा चुनाव में पड़ सकता है पार्टी पर असर
अलागिरी को निलंबित करने का करुणानिधि का यह फैसला उनकी पार्टी पर भारी पड़ सकता है। तमिलनाडु के कई शहरों में डीएमके काफी कमजोर हो चुकी है। अलागिरी मदुरै में काफी लोकप्रिय नेता हैं और उनके निलंबन से लोकसभा चुनाव में डीएमके का प्रदर्शन खराब रह सकता है। हाल ही में पार्टी की मदुरै यूनिट को भी बंद कर दिया गया था।