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पाकिस्तान में भी काटजू ने की मोदी की लानत-मलानत

9 वर्ष पहले
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नई दिल्ली. प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया (पीसीआई) के अध्यक्ष और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस मार्कंडेय काटजू एक बार फिर विवादों में हैं। काटजू ने गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ एक तरह से देश के बाहर अब विदेश में भी मोर्चा खोल दिया है। कुछ दिन पहले भारत के एक अंग्रेजी अखबार में मोदी के खिलाफ लिख गया उनका लेख सोमवार को पाकिस्तानी अखबार 'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' में छपा है। इसके बाद एक बार फिर बीजेपी उन पर बिफर गई है। पार्टी ने काटजू को उनके पद से तुरंत हटाने की मांग की है। पार्टी के नेता बलबीर पुंज ने कहा है कि काटजू जैसे बहुत लोग हैं जो पाकिस्तान की बोली बोलते हैं, ऐसे में इस बात पर कोई अचरज नहीं होना चाहिए कि मोदी पर उनका लेख पाकिस्तानी अखबार में छपा है। बीजेपी ने इसे राष्ट्रविरोधी लेख करार दिया है।
भारत के ही एक राष्ट्रीय दैनिक में लेख लिख कर मोदी पर निशान साधाने के बाद भी बीजेपी और काटजू के बीच ठन गई थी। राज्यसभा में बीजेपी नेता अरुण जेटली ने तो जस्टिस काटजू को बर्खास्त करने की मांग कर डाली थी। (चौंकाने वाले संकेत...दक्षिण में भी मोदी की आंधी, राहुल से युवा नाउम्‍मीद?)
पाकिस्तानी अख़बार में छपा काटजू के लेख के अंत में उनका परिचय सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज और प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के मौजूदा चेयरमैन के रूप में दिया गया है। कुछ दिनों पहले काटजू ने एक भारतीय अखबार में लिखे लेख में मोदी की आलोचना की थी। जब मीडिया ने उन पर पीसीआई का अध्यक्ष रहते हुए ऐसा लेख लिखने और लेख के अंत में अपना परिचय पीसीआई के अध्यक्ष के रूप में देने पर सवाल उठाए गए, तो जस्टिस काटजू ने कहा था कि उन्हें एक नागरिक की हैसियत से लेख लिखने का अधिकार है। उन्होंने माना था कि लेख के अंत में परिचय के रूप में उन्हें पीसीआई का चेयरमैन नहीं लिखना चाहिए था। जस्टिस काटजू ने यह भी माना था कि वे संबंधित अखबार को स्पष्टीकरण छापने को कहेंगे कि वह लेख काटजू ने भारत के एक नागरिक के तौर पर लिखा था। लेकिन ताजा मामले में पाकिस्तानी अखबार ने काटजू का परिचय पीसीआई के चेयरमैन के रूप में दिया है और लेख में संवैधानिक पद पर बैठने के बावजूद उन्होंने एक राजनेता के खिलाफ राजनीतिक बयानबाजी की है। काटजू ने 2002 के दंगों का उल्लेख किया है, जिस पर कई मुकदमे अदालतों में चल रहे हैं। (काटजू के बचाव में आई कांग्रेस)
मार्कंडेय काटजू ने लेख में गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है। उन्होंने लेख में हिटलर से तुलना करते समय मोदी का नाम तो नहीं लिया, लेकिन उनका इशारा साफ तौर पर मोदी की ही तरफ है। लेख का शीर्षक है 'मोदी और 2002 का नरसंहार।' इस लेख में काटजू ने लिखा है, 'मोदी के समर्थक दावा करते हैं कि गुजरात में जो कुछ हुआ वह गोधरा में ट्रेन में 59 हिंदुओं की हत्या की तात्कालिक प्रतिक्रिया थी। मैं इस कहानी पर यकीन नहीं करता। पहली बात यह अभी भी रहस्य है कि गोधरा में क्या हुआ था। दूसरी बात जो लोग भी गोधरा कांड के दोषी थे, उनकी पहचान होनी चाहिए और उन्हें कड़ी से कड़ी सजा मिलने चाहिए। लेकिन इससे गुजरात के मुस्लिम समुदाय पर हमले को कैसे जायज ठहराया जा सा सकता है?'
काटजू आगे लिखते हैं, 'गुजरात की कुल आबादी में मुसलमान 9 पर्सेंट हैं। बाकी ज्यादातर हिंदू हैं। 2002 में मुसलमानों का नरसंहार किया गया, उनके घर जलाए गए और उन्हें कई तरीके से निशाना बनाया गया। 2002 में मुसलमानों की हत्या को तात्कालिक प्रतिक्रिया कहना नवंबर 1938 में जर्मनी के क्रिस्टालनाष्ट की घटना की याद दिलाता है। जब जर्मनी में पूरे यहूदी समुदाय पर हमला किया गया था। तब नाजी सरकार ने दावा किया था कि ये एक तात्कालिक प्रतिक्रिया थी। लेकिन सच्चाई यह थी कि नाजी शासन ने योजनाबद्ध तरीके से उन्मादी भीड़ का इस्तेमाल कर इस घटना को अंजाम दिया था। मैं भारत के लोगों से अपील करता हूं कि अगर वह वाकई भारत के बारे में चिंतित हैं तो इन बातों का ख्याल रखें।'
(तस्वीर: एक कार्यक्रम में कांग्रेसी नेता कपिल सिब्बल के साथ मंच साझा करते हुए मार्कंडेय काटजू)
आगे की स्लाइडों में पाकिस्तानी अखबार में अंग्रेजी में छपे लेख का हिंदी अनुवाद पढ़िए:
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