नई दिल्ली. कांग्रेस दिल्ली में
आम आदमी पार्टी की सरकार का समर्थन जरूर कर रही है लेकिन दोनों दलों के बीच सियासी रिश्तों में तनातनी जारी है। ‘आप’ का प्रभाव न बढऩे पाए इसके लिए कांग्रेस कई स्तरों पर मंथन कर रही है। पार्टी प्रवक्ताओं, मीडिया पैनल के सदस्यों से कहा गया है कि वे सार्वजनिक बहस, मीडिया डिबेट में बार बार आम आदमी पार्टी का नाम लेने से बचें तो अच्छा है। जरूरी होने पर वे आम आदमी पार्टी की जगह
केजरीवाल की पार्टी कहें। इससे यह मैसेज जाएगा कि यह एक आदमी की पार्टी है न कि आम लोगों की पार्टी। पार्टी की रणनीतिक टीम में शामिल एक सदस्य ने कहा कि यह पार्टी का आधिकारिक निर्देश नहीं है लेकिन आम आदमी पार्टी के बारे में पार्टी के कुछ नेताओं ने इस तरह का सुझाव दिया था, जिसे पार्टी में अंदरूनी स्तर पर समर्थन मिला है।
समर्थन जारी रखकर घेरने की रणनीति
एक अलग रणनीति के तहत कांग्रेस ने यह योजना भी बनाई है कि ‘आप’ को मुद्दों पर समर्थन जारी रखने की जरूरत है, जिससे पार्टी को किसी तरह से लोगों की सहानुभूति हासिल करने का मौका नहीं मिले। कम से कम लोकसभा चुनाव तक पार्टी किसी तरह से समर्थन वापसी जैसे कदम पर गौर करने के मूड में नहीं है। सरकार के समर्थन की पैरवी करने वाले पार्टी नेताओं का मानना है कि सरकार जितने दिन चलेगी उसके क्रियाकलाप को देखकर लोगों का भ्रम टूटेगा।
पार्टी में मतभेद भी
कांग्रेस में आम आदमी पार्टी को समर्थन देने के मसले पर ही तीखे मतभेद रहे हैं। अब
केजरीवाल का धरना समाप्त करने के मसले पर भी पार्टी में मतभेद नजर आ रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि पार्टी में शीर्ष स्तर पर एक राय यह थी कि केजरीवाल का धरना समाप्त करने के लिए उनकी किसी भी शर्त को स्वीकार नहीं करना चाहिए था। उन्हें फेस सेविंग का मौका देने के पक्ष में भी पार्टी के तमाम नेता नहीं थे। पार्टी का यह धड़ा मान रहा था कि केजरीवाल का धरना अगर कुछ लंबा चला तो वे अपने आप लोगों के बीच अलोकप्रिय होंगे। रिपब्लिक डे परेड में व्यवधान को लेकर लोगों का गुस्सा आम आदमी पार्टी के प्रति बढ़ेगा। लेकिन गृहमंत्रालय और लेफ्टिनेंट गवर्नर के स्तर पर पूरे मामले को निपटाने के लिए बीच का रास्ता निकालने पर सहमति बन गई। अब पार्टी इसके लिए गृहमंत्री और लेफ्टिनेंट गवर्नर को बधाई दे रही है।
पार्टी प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने आम आदमी पार्टी की भाषा, उनके व्यवहार की आलोचना करते हुए गृहमंत्री और गवर्नर को इस बात का श्रेय दिया कि उन्होंने पूरे मामले को सूझबूझ और सहज तरीके से निपटाया।