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जम्मू के कई जिलों में तेज बारिश से राहत और बचाव कार्य बाधित, दवाइयों की भी हुई कमी

7 वर्ष पहले
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फोटोः श्रीनगर के मेडिकल कैंप में लोगों की मदद करती सेना की टीम।
श्रीनगर. भीषण बाढ़ से जूझ रहे जम्मू कश्मीर में पानी का स्तर तो कम हुआ है लेकिन रविवार सुबह को राज्य के अधिकतर जिलों में बारिश ने मुश्किलें बढ़ा दी हैं। राहत और बचाव के काम में परेशानी आ रही है। मौसम विभाग का कहना है कि अगले 24 से 48 घंटों में बारिश जारी रह सकती है। जम्मू, किश्तवाड़ और राजौरी में काफी तेज बारिश हो रही है। जम्मू-श्रीनगर हाइवे के खोले जाने में और भी देरी हो सकती है। राज्य में 49 हजार लोगों को बाढ़ से निकाला जा चुका है लेकिन करीब पांच लाख लोग अब फंसे हुए हैं। वहीं, लोग इस स्थिति में धैर्य खो रहे हैं। शनिवार को मदद ने मिलने से नाराज लोगों ने बचाव दल के हेलिकॉप्टर पर पत्थर भी फेंके।
महामारी फैलने का खतरा, दवाइयों की कमी
वहीं, बाढ़ के पानी से बीमारी फैलने का खतरा बढ़ गया है। श्रीनगर में डॉक्टर दवाइयों की कमी से जूझ रहे हैं। ज्यादातर अस्पताल अब भी शुरू नहीं हो पाए हैं। बाढ़ में अब भी मवेशियों के शव तैरते देखा जा रहे हैं। बीमारियों की आशंका को देखते हुए अब एनडीआरएफ ने 'बोट हॉस्पिटल' शुरू किए हैं। ये नावें जलमग्न इलाकों में लोगों को स्वास्थ्य संबंधी मदद मुहैया करा रही हैं।
अर्द्धसैनिक बलों के डॉक्टरों के पास इंसुलिन और अन्य जरूरी चीजें खत्म हो गई है। सीमा सशस्त्र बल (एसएसबी) के मेडिकल कमांडेंट डॉक्टर पीएम कुबई का कहना है, 'एंटिबायोटिक और बच्चों के लिए जरूरी कई दवाइयों को स्टॉक हमारे पास खत्म हो गया है।' शहर के डॉक्टर तनवीर का कहना है, 'कई तरह की बीमारियों के मरीज हमारे पास आ रहे हैं, इनमें ज्यादातर कॉम कोल्ड, बुखार और हड्डी टूटे मरीज शामिल हैं।'
5,400 से 5,700 करोड़ रुपए का नुकसान
उद्योग संगठन एसोचैम ने जम्मू और कश्मीर में बाढ़ के कारण अर्थव्यवस्था को 5,400 से 5,700 करोड़ रुपए के नुकसान होने का अनुमान लगाया है। व्यापार, होटल, रेस्टोरेंट्स, होर्टिकल्चर, हैंडीक्राफ्ट्स इंडस्ट्री में ज्यादा नुकसान का अनुमान है।
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