नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में हुए गैंगरेप केस में स्वत: संज्ञान लेते हुए ममता बनर्जी की सरकार को नोटिस जारी किया है। उन्हें मामले में 31 जनवरी तक जवाब देने को कहा गया है। इसके अलावा कोर्ट ने बीरभूम के जिला जज को निर्देश दिए हैं कि वह घटना स्थल का दौरा करें और एक हफ्ते में रिपोर्ट दें। आरोपियों का आज कोर्ट में पेशी भी है। सरकारी वकील का कहना है कि वे कोर्ट से आरोपियों की पुलिस रिमांड की मांग करेंगे। गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में 20 साल की एक आदिवासी
लड़की का 'कंगारू कोर्ट' के फरमान पर कथित तौर पर 13 लोगों ने गैंगरेप किया।
इस मामले में अभी तक क्या कार्रवाई हुई?
-गैंगरेप के आरोपी 13 अभियुक्तों की जमानत याचिका को गुरुवार को बोलपुर के सब डिविजनल मजिस्ट्रेट ने खारिज कर दिया।
-गुरुवार को ही अदालत ने इस केस में सभी 13 अभियुक्तों को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया था।
-इस घटना पर मचे सियासी बवाल के बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बीरभूम जिले से पुलिस अधीक्षक (एसपी) सी सुधाकर को सस्पेंड किया।
-ममता बनर्जी ने अभियुक्तों को रिमांड पर न लेने के कारण एसपी को फटकार भी लगाई।
-सभी अभियुक्तों को जेल हिरासत में भेजे जाने का निर्णय करने वाले अधिकारियों के खिलाफ भी ममता ने विभागीय जांच के आदेश दिए हैं।
क्या है मामला?
पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में 20 साल की एक आदिवासी
लड़की का कथित तौर पर 13 लोगों ने गैंगरेप किया। उसके साथ यह ज्यादती गांव के 'कंगारू कोर्ट' के फरमान पर की गई। बताया जाता है कि गांव के मुखिया का आदेश मिलते ही बांस के मचान पर उसके साथ बलात्कार किया गया, ताकि सभी गांव वाले उसे देख सकें। यही नहीं, बच्चों तक को वहां से नहीं हटाया गया।
घटना शांतिनिकेतन से मात्र 25 किमी की दूरी पर स्थित लाभपुर थाना अंतर्गत सुबलपुर गांव की है। लड़की का दूसरे गांव के लड़के से प्रेम प्रसंग चल रहा था। उसे इसी की 'सजा' दी गई। मुखिया ने लड़के को रात भर कैद रखा और लड़के को सुबह 25 हजार रुपए जुर्माना भरने के लिए कह कर छोड़ दिया। पुलिस का कहना है कि सभी 13 आरोपी पकड़ लिए गए हैं। इनमें गांव के कबीलाई समाज का मुखिया भी शामिल है। बताया जाता है कि मुखिया ने ही बतौर सजा लड़की से गैंगरेप करने का आदेश जारी किया था।
(फोटोः बीरभूम जिले की अदालत में पेशी के दौरान आरोपी।)
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