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Railway Live: स्टेशन पर पानी नहीं और मंत्रीजी वाई फाई की बात करते हैं!

9 वर्ष पहले
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रेलमंत्री पवन कुमार बंसल ने मंगलवार रेल बजट जारी करते हुए पूरा जोर बेहतर सुविधाओं और सुरक्षित यात्रा पर दिया। पवन बंसल के वादों को हकीकत की कसौटी पर परखने के लिए हम आंध्र प्रदेश संपर्क क्रांति एक्सप्रेस से हजरत निजामुद्दीन से काचीगुड़ा (हैदराबाद) की 24 घंटे की यात्रा पर निकले हैं। इस यात्रा के अनुभव हम आपको इस ब्लॉग के जरिए प्रस्तुत करेंगे।
निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन की ओर जाने वाले रास्ते पर ऑटो और टैक्सी वालों ने पूरा कब्जा कर लिया है। स्टेशन में एंट्री लेना ही एक बड़ा संघर्ष है। जैसे-तैसे हम प्लेटफॉर्म नंबर 7 पर पहुंचे।
पवन बंसल ने मंगलवार को जारी रेल बजट में आदर्श स्टेशन स्थापित करने और वाई फाई जैसी आधुनिक सुविधाएं देने की बात की है। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि यात्रियों को प्लेटफॉर्म पर पीने के लिए पानी उपलब्ध नहीं है। प्लेटफार्म नंबर सात पर कोल्ड ड्रिंकिंग वॉटर (पीने का शीतल जल) की टंकियां तो उपलब्ध हैं लेकिन टंकियों में पानी नहीं है।
कल जब पवन बंसल ने फ्री वाई फाई देने की बात की थी तो ट्विटर और फेसबुक के जरिए लोगों ने उनसे पहले फ्री पीने का पानी उपलब्ध कराने की मांग की थी। पवन बंसल के बेहतर सुविधाओं के वादे वास्तविकता के धरातल पर कोरा छूठ नजर आते हैं।
ट्रेन फिलहाल अपने तय वक्त सात बजकर 20 मिनट पर निजामुद्दीन के स्टेशन से चली है। डिब्बे में साफ-सफाई ठीक ठाक है। दोनों शौचालय में से एक में ही सोप डिस्पेंसर काम कर रहा है। हालांकि यात्रियों को अभी तक हैंड टॉवल नहीं दिए गए हैं।
मेरे साथ बैठे बाबूराम गोयल भी काचीगुड़ा तक ही जा रहे हैं। बाबुराम गोयल कहते हैं, 'अब सारी सुविधाएं ठेकेदारों के जरिए दी जाती हैं, यही कारण है कि ट्रेन को चले हुए आधा घंटा हो चुका है लेकिन अभी तक न कोई वॉर्डब्यॉय आया है और न ही कोई अटेंडेंट। यात्री को सुविधा मिले या न मिले इससे किसी को फर्क नहीं पड़ता। जिस हिसाब से किराया लिया जाता है उस हिसाब से सुविधाएं अभी तक नहीं मिल पाती हैं।'
बाबुराम पेशे से व्यापारी हैं और नियमित यात्रा करते हैं। उन्होंने रेलवे एजेंट के जरिए टिकट बुक कराया है। इस ट्रेन में आसानी से सीटें उपलब्ध थी लेकिन फिर भी उन्होंने स्वयं अपना टिकट बुक नहीं किया। वह कहते हैं, 'आईआरसीटीसी की वेबसाइट से टिकट बुक करना आम आदमी के बस की बात नहीं है। आपात स्थिति में यदि आपको कहीं जाना पड़ जाए तो कंफर्म टिकट मिल ही नहीं सकती, वेटिंग में लो तो टीटी को पैसे दिए बिना सीट नहीं मिल सकती।'
बाबुराम के साथ ही यात्रा कर रहे केसी जिंदल कहते हैं, 'चुनाव के कारण रेलवे ने टिकट नहीं बढ़ाया। यदि किराया बढ़ता भी तो उतनी दिक्कत नहीं होती लेकिन कम से कम सुविधाएं तो उपलब्ध हैं। अभी जितना किराया है उसके हिसाब से भी सुविधाएं यात्रियों को नहीं मिल पा रही हैं।'

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