(फाइल फोटोः मंगल की कक्षा में चक्कर लगा रहा अमेरिका का मेवन यान)
नई दिल्ली. भारत के पहले अंतरग्रहीय मिशन '
मंगलयान' सहित कुल पांच उपग्रह इस समय मंगल के चक्कर लगा रहे हैं जबकि अमेरिका के दो रोवर लाल ग्रह की सतह पर सक्रिय हैं। मंगलयान के अलावा अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के तीन ऑर्बिटर मार्स ओडिसी, मेवन और एमआरओ तथा यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ईएसए) का मार्स एक्सप्रेस मंगल की कक्षा में सक्रिय है। मेवन को मंगलयान से तीन दिन पहले 21 सितंबर को लाल ग्रह की कक्षा में स्थापित किया गया था। इसके अलावा नासा के दो रोवर अपार्च्यूनिटी और क्यूरियोसिटी मंगल की सतह पर मौजूद हैं।
मार्स ओडिसी को अप्रैल 2001 में, मार्स एक्सप्रेस को जून 2003 में, एमआरओ को अगस्त 2005 और मेवन को नवंबर 2013 को प्रक्षेपित किया गया था। अपार्च्यूनिटी जुलाई 2003 में मंगल की तरफ उड़ा था जबकि क्यूरियोसिटी ने नवंबर 2011 में मंगल की राह पकड़ी थी। अब तक अमेरिका, रूस और यूरोपीय संघ ही मंगल पर सफलतापूर्वक मिशन भेजने में कामयाब रहे हैं। मंगल पर इससे पहले कुल 23 ऑर्बिटर मिशन भेजे गए जिनमें से केवल दस ही सफल रहे हैं। पड़ोसी ग्रह मंगल पर ऑर्बिटर भेजने की शुरुआत सोवियत संघ ने शीतयुद्ध के दौर में की थी। उसने 27 मार्च 1969 को मार्स-2 एम नाम से पहला मिशन मंगल की ओर भेजने की कोशिश की लेकिन इसका प्रक्षेपण नाकाम रहा।
पहली बार अमेरिका को सफलता
लाल ग्रह की कक्षा में पहली बार यान को स्थापित करने की उपलब्धि अमेरिका के नाम है। उसने 30 मई 1971 को मरीनर-9 नाम से एक मिशन लॉन्च किया था, जो 30 नवंबर 1971 को मंगल की कक्षा में प्रवेश करने में सफल रहा। सोवियत संघ ने उसी साल 'मार्स-2' और 'मार्स-3' नाम से मंगल पर दो मिशन भेजे जो कामयाब रहे। ईएसए ने 2003 में मंगल की तरफ अपना पहला अभियान मार्स-एक्सप्रेस भेजा, जो सफल रहा। एशिया की तरफ से मंगल पर मिशन भेजने की शुरआत जापान ने की थी, लेकिन उसे इसमें कामयाबी नहीं मिली। उसने 1998 में नोजोमी नाम के मिशन को मंगल की तरफ भेजा, लेकिन ईंधन खत्म होने के कारण यह अपनी मंजिल पर नहीं पहुंच पाया।
चीन का यान पृथ्वी पर गिर गया थाचीन ने नवंबर 2011 में यिंगहुओ-1 नाम से अपना पहला मिशन मंगल की ओर भेजा लेकिन यह पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र से बाहर नहीं निकल पाया और नष्ट होकर पृथ्वी पर गिर गया। भारत का मंगलयान अपने साथ पांच प्रायोगिक उपकरण भी ले गया है, जिनसे मिली जानकारी के आधार पर
इसरो भविष्य में मंगल की ओर जाने वाले अपने मिशनों की रूपरेखा तय करेगा। इसरो की योजना मंगल पर ऑर्बिटर और लेंडर भेजने की है। इस मिशन को जीएसएलवी के जरिए भेजा जा सकता है।