नई दिल्ली. कांग्रेस ने कहा है कि वर्ष 2014 तक मनमोहन सिंह ही प्रधानमंत्री बने रहेंगे। पार्टी ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष कई बार इसे स्पष्ट कर चुकी हैं, यह स्थिति बदली नहीं है। पिछले 24 घंटों के भीतर कांग्रेस को दूसरी बार प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह केे पक्ष में जोरदार तरीके से सफाई देनी पड़ी है। कहा जा रहा है कि पवन बंसल व अश्विनी कुमार के इस्तीफों के बाद लगातार नकारात्मक खबरों से प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह आहत हुए हैं। वहीं पार्टी को लग रहा है कि कुछ लोग जानबूझकर सरकार को अस्थिर करने का प्रयास कर रहे हैं। कांग्रेस महासचिव जनार्दन द्विवेदी ने कहा कि वर्ष 2014 तक मनमोहन सिंह ही प्रधानमंत्री रहेंगे। पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी ने वर्ष 2009 में यह वादा किया था इस स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है। उन्होंने कहा, ‘इस संबंध में नए सिरे से कोई फैसला नहीं हुआ है। जो भी खबरें आ रही हैं, वे अफवाह और दुष्प्रचार है। हम इसका खंडन ही नहीं, भत्र्सना करते हैं।’
कांग्रेस महासचिव ने कहा, ‘आप उस दिन को याद कीजिए जब पार्टी का वर्ष 2009 का घोषणा पत्र जारी करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष ने घोषणा पत्र के पहले पेंज पर छपी अपनी तस्वीर पर हाथ रखते हुए मनमोहन सिंह की तस्वीर दिखाई थी और यह कहा था कि चुनाव के बाद हमारे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ही होंगे। वही स्थिति आज भी है।’
जनार्दन द्विवेदी ने कहा, ‘कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बीच जो रिश्ते हैं वह किसी भी प्रधानमंत्री या पार्टी अध्यक्ष के बीच नहीं हो सकते। यह सर्वोत्तम संबंध है। अफवाहें फैलाने वालों को हमेशा की तरह शर्मिंदा होना पड़ेगा। अच्छा हो, उन्हें अभी सद्बुद्धि आ जाए।’
कांग्रेस को यह सफाई उन खबरों की पृष्ठभूमि में देनी पड़ी है, जिनमें सरकार के भीतर ही एक तबके द्वारा प्रधानमंत्री को मानसून सत्र से पहले हटाने और राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बनाने की मांग का जिक्र किया गया था। कांग्रेस महासचिव जनार्दन द्विवेदी ने कहा कि पार्टी ने हर मौके पर दोहराया है कि वर्ष 2014 तक मनमोहन सिंह ही प्रधानमंत्री रहेंगे।
इसलिए उठे सवाल
प्रधानमंत्री और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के बीच सबकुछ ठीक नहीं होने और प्रधानमंत्री की अथॉरिटी को लेकर विपक्ष ने कई मौकों पर सवाल उठाए हैं। यह बहस तब तेज हुई जब पवन बंसल व अश्विनी कुमार को मंत्री पद से हटाने में देरी के मसले पर कांग्रेस अध्यक्ष की कथित नाराजगी सामने आई। दोनों मंत्रियों को हटाने में भी कांग्रेस अध्यक्ष को ही श्रेय दिया गया। माना जाता है कि प्रधानमंत्री लगातार नकारात्मक खबरों से आहत हुए। अचानक रविवार को कांग्रेस की ओर से सफाई आई कि प्रधानमंत्री व कांग्रेस अध्यक्ष दोनों ने मिलकर मंत्रियों के इस्तीफे पर फैसला किया।
उन खबरों को खारिज किया गया जिसमें सोनिया की वजह से ही मंत्रियों के इस्तीफे की बात की गई थी। लेकिन इससे भी चर्चा थमी नहीं और यह खबर आ गई कि सरकार का एक खेमा प्रधानमंत्री को उनके पद से हटाना चाहता है। इस पर पार्टी फौरन हरकत में आई और सोमवार शाम होते होते प्रधानमंत्री के पक्ष में मजबूती से बयान दिया गया।
सोनिया खुद लगाएंगी अफवाहों पर ब्रेक
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी यूपीए-2 की चौथी सालगिरह के मौके पर 22 मई को कांग्रेस पार्टी और सरकार के बीच खींचतान की अफवाहों पर खुद पूर्णविराम लगा सकती हैं। सूत्रों के मुताबिक इस मौके पर सोनिया न सिर्फ मनमोहन साथ खड़ी दिखेंगी बल्कि अपने भाषण में यूपीए की उपलब्धियों का सेहरा भी मनमोहन के सिर बांधेंगी। पार्टी के उच्च सूत्रों ने बताया कि सरकार और संगठन के बीच दूरी या प्रधानमंत्री या मंत्रियों के बीच अनबन की बातें विपक्षी दलों का दुष्प्रचार है। इसलिए सोनिया के साथ यूपीए के दूसरे घटक दल भी इस मौके पर प्रधानमंत्री के पक्ष में एकजुटता दिखाएंगे। इस मौके पर सोनिया के भाषण में आधार, डायरेक्ट टू कैश, सामाजिक क्षेत्र की योजनाओं जैसे यूपीए-2 सरकार की उपलब्धि बताई जाएंगी।
सूत्रों के मुताबिक रूरल लाइवलीहुड फाउंडेशन पर वित्त मंत्री पी. चिदंबरम की अगुवाई में एक मंत्री-समूह भी बना दिया गया है। इसके तहत रोजगार उपलब्ध कराने की कई योजनाएं जारी हो सकती हैं। इन तमाम योजनाओं के लिए खुद सोनिया आगे आकर मनमोहन और उनकी सरकार के पीठ थपथपाएंगी।