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मोदी को लेकर राहुल गांधी और एनसीपी में मतभेद

7 वर्ष पहले
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नई दिल्ली. नरेंद्र मोदी की गुजरात दंगों में भूमिका पर दिए गए राहुल गांधी के बयान से एनसीपी ने किनारा कर लिया है। एनसीपी नेता प्रफुल्ल पटेल ने कहा है कि वे और उनकी पार्टी राहुल गांधी के बयान का समर्थन नहीं करते हैं। पटेल ने कहा है कि इस बारे में कोर्ट का फैसला आ चुका है और मामले की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में बनी एसआईटी को भी मोदी के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिले हैं, एसआईटी मोदी को 'क्लीन चिट' दे चुकी है। पटेल के मुताबिक इन बातों के मद्देनजर कोर्ट के फैसले पर सवाल उठाना ठीक नहीं है। एनसीपी यूपीए की पुरानी सहयोगी है जो केंद्र में ही नहीं महाराष्ट्र में भी कांग्रेस सरकार का समर्थन कर रही है।
कांग्रेस का पलटवार
एनसीपी नेता प्रफुल्ल पटेल के बयान पर कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा है कि राहुल की बातों पर अपना नजरिया रखने के लिए पटेल स्वतंत्र हैं,लेकिन पार्टी की तरफ से अधिकृत नहीं सुरजेवाला के मुताबिक राहुल ने कुछ गलत नहीं कहा अगर फैसले में अधूरा न्याय हो तो सवाल उठाना जरूरी है और राहुल के विरोध का आधार भी कुछ इसी तरह था। उन्होनॆ राहुल गांधी के पीएम उम्मीदवार को लेकर भी भ्रम की स्थति को साफ किया उन्होंने कहा कि न तो कांग्रेस और न ही उसके किसी सहयोगी ने यूपीए की तरफ से किसी को पीएम केंडीडेट घोषित करने की मांग की है। यूपीए अध्यक्ष इस बारे में एआईसीसी की बैठक में सबकुछ साफ कर चुकी हैं।
क्या कहा था राहुल ने
कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने एक प्राइवेट टीवी न्यूज चैनल को दिए अपने इंटरव्यू मे 2002 के गुजरात दंगों को 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुए दंगों से अलग बताया था। राहुल ने कहा था कि गुजरात के दंगों में वहां की सरकार और तत्कालीन मुख्यमंत्री की भूमिका थी। सरकार ने दंगे रोकने की कोशिश नहीं की जबकि सिख दंगों को रोकने के लिए तब की केंद्र सरकार ने कोशिश की थी।