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गोयल के नेतृत्व में भाजपा बैनर में आडवाणी को जगह नहीं

9 वर्ष पहले
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नई दिल्ली। बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष नितिन गडकरी की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। नागपुर की एक अदालत ने गुरुवार को नितिन गडकरी की कार में मिली सात साल की बच्ची योगिता ठाकरे के केस की सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को खारिज कर दिया। 2009 में गडकरी के घर के बाहर उनकी कार में योगिता ठाकरे का शव मिला था जिसे सीबीआई ने जांच दुर्घटना में हुई मौत बताया था लेकिन योगिता के पिता ने उसकी हत्या की आशंका जताई थी। अदालत ने योगिता के पिता की शिकायत स्वीकार कर ली है। अदालत के इस फैसले के बाद बजट सत्र में बीजेपी की मुश्किलें भी बढ़ सकती हैं। (देखें हैदराबाद में आतंकी हमले की तस्‍वीरें)
भाजपा के लौहपुरुष लालकृष्ण आडवाणी को दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष विजय गोयल ने पार्टी के बैनर से राम-राम कर दिया है। 21 फरवरी से शुरू हुए बजट सत्र से ठीक एक दिन पहले जंतर मंतर पर ‘हिंदू आतंकवाद’ संबंधी केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे के बयान के खिलाफ पार्टी की रैली में मंच के पीछे लगे बड़े से बैनर पर आडवाणी की तस्वीर नहीं थी। गोयल ने तर्क दिया है कि बैनर-पोस्टर में उनकी तस्वीर नहीं है, जिन्हें प्रदर्शन में शामिल नहीं होना था। लेकिन पोस्टर में सुषमा स्वराज की तस्वीर थी जबकि प्रदर्शन में उन्हें भी शामिल नहीं होना था।
दिल्ली भाजपा के इतिहास में यह पहला मौका है जब पार्टी के किसी कार्यक्रम के मुख्य बैनर में आडवाणी की तस्वीर नहीं लगाई गई है। आडवाणी चाहे किसी रैली या धरने में शामिल न हुए हों पर उनकी तस्वीर मुख्य बैनर में जरूर रही है। यह पहला मौका था जब बैनर में सुषमा स्वराज, अरुण जेटली, डा. मुरली मनोहर जोशी, वेंकैया नायडू, नितिन गडकरी और राजनाथ सिंह की तस्वीर थी लेकिन आडवाणी की नहीं।
मंच पर मौजूद भाजपा के वरिष्ठ नेताओं का ध्यान भी इस ओर गया। बाद में जब मीडिया के लोगों ने इस बारे में पूछा तो विजय गोयल की तरफ से तर्क दिया गया कि चूंकि आडवाणी को इस कार्यक्रम में शामिल नहीं होना था इसलिए उनकी तस्वीर बैनर में नहीं है। लेकिन जब उनका ध्यान बैनर में लगे सुषमा स्वराज की तस्वीर की ओर दिलाया गया तो उन्होंने चुप्पी साध ली। विदित हो कि मजदूर संघों के भारत बंद के पहले दिन ही भाजपा ने भी गृह मंत्री के भगवा आतंकवाद संबंधी बयान के खिलाफ जंतर-मंतर पर बुधवार को प्रदर्शन किया था। इस प्रदर्शन का असर भी हुआ और शाम तक गृह मंत्री ने बयान पर खेद जता दिया था।
चूंकि लोकसभा अध्यक्ष की ओर से बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में लालकृष्ण आडवाणी और सुषमा स्वराज को शामिल होना था इसलिए प्रदर्शन में उनके शामिल होने का कार्यक्रम नहीं था। दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद विजय गोयल के नेतृत्व पहली बार विशाल प्रदर्शन का आयोजन हुआ था लेकिन पहले ही दिन बैनर में आडवाणी को जगह नहीं मिली।

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