(फाइल फोटोः जयललिता, तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री) नेशनल डेस्क. आय से अधिक संपत्ति के मामले में 4 साल की सजा पाने वाली जयललिता को तमिलनाडु के सीएम का पद छोड़ना पड़ा। जयललिता के खासमखास ओ. पनीरसेल्वम ने नए मुख्यमंत्री की शपथ भी ले ली है। देखा जाए तो जयललिता पहली ऐसी मुख्यमंत्री हैं जिन्हें पद पर रहते हुए सजा हुई और कुर्सी छोड़नी पड़ी। हालांकि कोर्ट के आदेश से जिन नेताओं की कुर्सी गई है, उनमें जयललिता अकेली नहीं है। उमा भारती, येदियुरप्पा, अशोक चव्हाण, लालू प्रसाद यादव और मदनलाल खुराना जैसे कई नाम इस फेहरिस्त में शुमार हैं।
जनप्रतिनिधित्व कानून के अमल में आने से दागी-राजनेताओं पर संकट बढ़ा है। हालांकि यह पहले भी था, लेकिन संशोधन के बाद स्थिति पहले से ज्यादा विकट हो गई है। पहले आरोप लगने या चार्जशीट दायर होने के बाद भी नेता पद पर बने रहते थे। कानूनी दांवपेंच का इस्तेमाल कर वे किसी न किसी तरह से अपनी राजनीति चलाते रहते थे। लेकिन 2013 के बाद तकरीबन सभी दलों के नेता इस कानून की जद में आ गए। आइए जानें, जयललिता के अलावा वे कौन से और नेता हैं जिनकी कुर्सी कोर्ट के एक आदेश ने छीन ली...
सुश्री उमा भारती
राज्यः मध्यप्रदेश
वर्तमान- केंद्रीय मंत्री
कब- 2004 में जब मध्यप्रदेश की मुख्यमंत्री थीं।
क्या हुआ- 1994 में हुबली की ईदगाह पर तिरंगा लहराने को लेकर हुए दंगों के चलते उमा भारती के ऊपर एक मामला दर्ज हुआ था और इसमें 2004 में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री होते हुए उनके खिलाफ गिरफ्तारी का वारंट जारी किया गया था। पार्टी के कहने पर उमा भारती ने इस्तीफा दे दिया और हुबली तक की यात्रा निकाली। हालांकि बाद में उन्हें जमानत मिल गई, लेकिन इसके बाद वह मध्यप्रदेश से दूर हो गईं और पार्टी से भी। अरसे बाद बीजेपी में उनकी वापसी हुई। उत्तरप्रदेश से विधानसभा चुनाव लड़ा और जीती भीं। इसके बाद 2014 में हुए लोकसभा चुनावों में झांसी से सांसद बनकर दिल्ली पहुंची और अब केंद्रीय मंत्री हैं।
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