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  • Now It Will Be Unfair To Hang Murdereres Of Rajiv Gandhi, Says Former Judge

\'राजीव के हत्यारों को अब फांसी देना ठीक नहीं\'

9 वर्ष पहले
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तिरुवनंतपुरम. पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के हत्यारों को फांसी की सजा देने वाले सुप्रीम कोर्ट के जज अब फैसले पर अमल के खिलाफ हो गए हैं। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज केटी थॉमस का कहना है कि तीनों दोषियों को अब फांसी देना संवैधानिक तौर पर गलत होगा। जस्टिस थॉमस सुप्रीम कोर्ट की उस तीन सदस्यीय बेंच के प्रमुख थे जिसने 13 साल पहले राजीव के हत्यारों की फांसी की सजा पर मुहर लगाई थी। लेकिन अब उनका कहना है कि राजीव गांधी की हत्या के दोषी मुरुगन, सांथन और पेरारिवलन 22 साल से जेल में बंद हैं। इस दौरान उनके केस पर पुनर्विचार भी नहीं किया गया। जबकि यह सभी कैदियों को संवैधानिक अधिकार है। इसके अलावा सजा पर मुहर लगाते वक्त सुप्रीम कोर्ट ने तीनों दोषियों की प्रकृति और चरित्र के बारे में भी विचार नहीं किया था। ऐसे में फांसी की सजा संविधान के अनुच्छेद 22 का उल्लंघन है। 2010 में सुप्रीम कोर्ट इस बारे में फैसला दे चुका है।
दया याचिका खारिज, केस फिर कोर्ट में : मुरुगन, सांथन और पेरारिवलन की दया याचिका तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा पाटील ने 2011 में खारिज कर दी थी। इसके बाद उन्हें नौ सितंबर 2011 को फांसी दी जानी थी। लेकिन उन्होंने दया याचिका पर फैसले में देरी को आधार बनाते हुए मद्रास हाईकोर्ट में याचिका लगा दी। इसके बाद हाईकोर्ट ने छह स:ताह के लिए फांसी दिए जाने पर रोक लगा दी थी। बाद में यह मामला सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर हो गया। यह अब भी वहां लंबित है।
सुप्रीम कोर्ट के 2010 के फैसले का दिया उदाहरण:जस्टिस थॉमस ने सुप्रीम कोर्ट के 2010 के फैसले का उदाहरण दिया। बरियार केस में जस्टिस एसबी सिन्हा की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा था कि मौत की सजा सुनाए जाने से पहले आरोपी के चरित्र और स्वभाव को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।