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बदामी के इन गुफा मंदिरों में सिमटी है विरासत, देखें तस्वीरें

7 वर्ष पहले
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(फोटोः बदामी की गुफाएं)
नई दिल्ली. भारत कभी ऐसे शासकों और कलाकारों से समृद्ध था, जो इतिहास के पन्नों पर एक अमिट छाप छोड़ गए। उनके द्वारा ऐसे कई स्मारक सृजित किए गए हैं, जो आज हमें आश्चर्य से भर देते हैं। उत्तरी कर्नाटक में बदामी ऐसा ही एक गौरवशाली आश्चर्य है। यहां चट्टानों को काटकर बनाए गए गुफा मंदिर हैं। छुट्टियां बिताने के भीड़ भरे मशहूर पर्यटन स्थलों से परे बदामी और इसके आसपास का इलाका चालुक्य वास्तुशिल्प से हमें परिचित करवाता है। बदामी चालुक्य साम्राज्य की राजधानी थी। यहां बलुआ पत्थरों को तराशकर और कुशलतापूर्वक संवारकर गुफा मंदिर बनाए गए हैं। माना जाता है ये मंदिर छठवीं से आठवीं शताब्दी के मध्य चालुक्य वंश के कीर्ति वर्मन और मंगलेश प्रथम ने बनवाए थे। यहां के चार गुफा मंदिरों में दो भगवान विष्णु, एक भगवान शिव और एक जैन तीर्थंकरों को समर्पित हैं।

भूतनाथ मंदिर परिसर
भूतनाथ मंदिर परिसर अगस्त कुंड के किनारे है। खूबसूरती और शांति के लिहाज से यह बहुत सुंदर स्थान पर बना है। यह मंदिर पश्चिममुखी है। ऐसे में यहां सूर्यास्त के समय अच्छी रोशनी रहती है, इसलिए बेहतर होगा कि आप यहां शाम को जाएं। मंदिर से संग्रहालय बहुत दूर नहीं है, जहां आप जा सकते हैं। अगर वक्त इजाजत देता है तो आप बदामी का किला देखने भी जा सकते हैं। इसका निर्माण मैसूर राज्य के शासक टीपू सुल्तान ने अठारहवीं सदी के आसपास करवाया था। कर्नाटक में बदामी प्राचीन संपदा से भरा एक बहुत सुंदर स्थान है। खासतौर पर यहां के गुफा मंदिर पर्यटकों को आश्चर्य से भर देते हैं। इनके अंदर की गई सुंदर शिल्पकारी सराहनीय है।
- कहां ठहरें
बदामी में ठहरने के सीमित स्थान हैं और आपके लिए सबसे बेहतर कर्नाटक राज्य पर्यटन विकास निगम द्वारा संचालित चालुक्य होटल रहेगा, जो बदामी के गुफा मंदिरों से करीब एक किलोमीटर दूर है। यहां सभी सुविधाएं संतोषजनक हैं।
- कैसे पहुंचे
बदामी तक देश के विभिन्न हिस्सों से फ्लाइट या ट्रेन से पहुंचा जा सकता है। 106 किलोमीटर दूर हुबली सबसे करीबी एयरपोर्ट है। शहर का रेलवे स्टेशन पांच किलोमीटर दूर है। घूमने-फिरने के लिए यहां किराए पर ऑटो लिया जा सकता है।

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