चीन से हो रही लगातार घुसपैठ के बीच 26 जुलाई को करगिल जंग के 14 साल हो गए हैं लेकिन
इस युद्ध में शहीद हुए सैनिकों की दिलेरी की दास्तां आज भी देशवासियों की जुबान पर है। पाकिस्तानी सैनिक मई 1999 में करगिल सेक्टर में घुसपैठियों की शक्ल में घुसे और नियंत्रण रेखा पार कर हमारी कई चोटियों पर कब्जा कर लिया। दुश्मन की इस नापाक हरकत का जवाब देने के लिए आर्मी ने 'ऑपरेशन विजय' शुरू किया, जिसमें 30,000 भारतीय सैनिक शामिल थे। एयरफोर्स ने आर्मी को सपोर्ट करने के लिए 26 मई को 'ऑपरेशन सफेद सागर' शुरू किया, जबकि नौसेना ने कराची तक पहुंचने वाले समुद्री मार्ग से सप्लाई रोकने के लिए अपने पूर्वी इलाकों के जहाजी बेड़े को अरब सागर में ला खड़ा किया। 26 जुलाई 1999 को भारतीय सेना ने करगिल को पाकिस्तानी सैनिकों के कब्जे से पूरी तरह मुक्त करा लिया। इसके बाद से हर साल 26 जुलाई को 'करगिल विजय दिवस' के रूप में मनाया जाता है।
करगिल की लड़ाई पहाड़ी इलाकों में ऊंचाई पर लड़ी गई जंग के ताजा उदाहरणों में से एक है। 1969 में चीन और सोवियत संघ के बीच हुए संघर्ष के बाद परमाणु क्षमता से लैस दो देशों के बीच जमीन पर यह दूसरी सीधी जंग थी। इस लड़ाई में दोनों देशों की सेना को नुकसान हुआ था। शुरु में पाकिस्तान ने दावा किया उसके 375 सैनिक मारे गए हैं लेकिन बाद में सामने आया कि करीब चार हजार पाकिस्तानी करगिल जंग में मारे गए हैं। भारतीय सेना के मुताबिक 543 अफसर और जवान शहीद हुए जबकि करीब 1300 जख्मी हुए। महज एक भारतीय सैनिक को युद्धबंदी बनाया गया था।