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सरकार का दावा, 28 रुपये कमाने वाले गरीब नहीं

8 वर्ष पहले
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नई दिल्ली. योजना आयोग के गरीबी रेखा को लेकर ताज़ा आंकड़े विवादों के घेरे में आ गए हैं। ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक आयोग का दावा है कि 2004-05 में गरीबी अनुपात 37.2 प्रतिशत था, जो 2011-12 में घटकर 21.9 प्रतिशत रह गया है।

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योजना आयोग ने गरीबी का आकलन सुरेश तेंडुलकर समिति की ओर से सुझाए गए मापदंडों के आधार पर किया है। इसके अनुसार गांवों में 816 रुपए और शहरों में 1000 रुपए प्रतिमाह आय को गरीबी रेखा से ऊपर माना गया है। शहरों में प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 33.33 रुपए और गांवों में 27.20 रुपए प्रति व्यक्ति प्रतिदिन खर्च करने वाले गरीबों की श्रेणी में नहीं आते हैं।
आगे की स्लाइड में पढ़िए, किस तरह से इन आंकड़ों में हैं पांच खामियां:

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