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नई दिल्ली: पीएम नरेंद्र मोदी ने
अमेरिका दौरे पर निकलने से पहले गुरुवार को अपना महत्वाकांक्षी 'मेक इन इंडिया' प्रोग्राम लॉन्च किया। कैंपेन का लोगो लॉन्च करने के बाद उद्योगपतियों को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि उनकी सरकार के फैसलों से भरोसे का माहौल बना है। उन्होंने विकास में सरकार और जनता दोनों की भागीदारी जरूरी बताते हुए एफडीआई की नई परिभाषा दी। उन्होंने कहा कि भारतीयों के लिए एफडीआई का मतलब है 'फर्स्ट डेवलप इंडिया'। मोदी ने कहा, ''सरकार किसलिए होती है? यह हर भारतीय के लिए है। यह सबसे गरीब व्यक्ति के लिए है। लोग आजकल एफडीआई के लिए बात कर रहे हैं। एफडीआई की देश के लिए एक जिम्मेदारी है। दुनिया के लिए एफडीआई एक मौका है। एफडीआई का यह भी मतलब है, 'फर्स्ट डेवलप इंडिया'।''
माहौल बदलने की कोशिश की: मोदी
मोदी ने कहा, ''मुझे यह देखकर दुख होता था कि लोग भारत में निवेश करने के इच्छुक नहीं हैं। बीते कुछ सालों में मैं जिससे मिलता था, वह अपना बिजनेस विदेश में शिफ्ट करना चाहता था। हमने उस माहौल को बदलने की कोशिश की है, जिसकी वजह से व्यापारी देश छोड़ने के लिए मजबूर होते हैं।''
मल्टीनेशनल बनें देशी कंपनियां: मोदी
मोदी ने कारोबारियों से कहा, ''यह आपका देश है। यहां सफल होना और इस सफलता को विदेशों तक ले जाने का अलग आनंद है। मेरे ख्याल से राज्यों में निवेश से ही देश का विकास होगा। हमारी सरकार विकास के लिए प्रतिबद्ध है। मैं चाहता हूं कि भारतीय कंपनियां मल्टीनेशनल में तब्दील हों। लेकिन वे देश को मजबूत बनाएं।''
नए जुमलों का इस्तेमाल
मोदी ने अगली पीढ़ी के इन्फ्रास्ट्रक्चर की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि हमें सिर्फ हाईवे ही नहीं, आईवे 'इनफॉर्मेशन वे' भी चाहिए। मोदी ने 'लुक ईस्ट' पॉलिसी की तरह ही लिंक 'वेस्ट पॉलिसी' पर भी जोर दिया। मोदी ने मंगल मिशन की कामयाबी का भी जिक्र किया। मोदी ने कहा कि कल की घटना के बाद कोई हमारे लोगों के टैलेंट पर सवाल नहीं उठाएगा।
माफी मांगी तो बजी ताली
मोदी ने भाषण की शुरुआत हल्के मूड में की। उन्होंने कहा, ''मैंने देखा कि बहुत सारे लोगों को सीट नहीं मिली। मैं इसके लिए माफी मांगता हूं। इस हॉल को इतने सारे लोगों की आदत नहीं है।'' उनके ऐसा कहते ही हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
दुनिया भर में कार्यक्रम
दुनिया भर के देशों की राजधानी में 'मेक इन इंडिया' कार्यक्रम के प्रमोशन के लिए खास इंतजाम किए गए हैं। इसके अलावा, भारतीय दूतावासों में भी कार्यक्रम रखे गए हैं। बता दें कि पीएम ने 15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर से भाषण देते हुए 'मेक इन इंडिया' का नारा दिया था। राजधानी के विज्ञान भवन में गुरुवार को उन्होंने देश-विदेश के नामी उद्योगपतियों की मौजूदगी में इस कार्यक्रम की शुरुआत की। इस योजना के जरिए दुनिया की टॉप 3000 कंपनियों को भारत में निवेश करने के लिए जोड़ने की योजना है।
उद्योगपतियों ने की तारीफ
इस मौके पर मौजूद रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने वादा किया कि वह अगले 12 से 15 महीने में सवा लाख नौकरियां पैदा करेंगे। आईसीआईसीआई बैंक की प्रमुख चंदा कोचर ने कहा कि पीएम मोदी की यह पहल भारत की आर्थिक तरक्की को रफ्तार देगा। कोचर के मुताबिक, यह पहल प्रेरणादायी है। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के मजबूत होने से देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। वहीं, विप्रो के प्रमुख अजीम प्रेमजी ने कहा कि मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की कामयाबी ग्लोबल मार्केट की डिमांड पूरी करने में है।
कांग्रेस ने साधा निशाना
कांग्रेस ने मोदी सरकार के इस कैंपेन पर निशाना साधा है। कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि यूपीए सरकार ने वर्ष 2010 में ही 'इनवेस्ट इंडिया' प्रोग्राम शुरू किया था, जिसका उद्देश्य निवेश को आकर्षित करना था।
क्या है मकसद
इस योजना के तहत देशी कंपनियों को आसानी से उद्योग-धंधे स्थापित करने का माहौल दिया जाएगा। विदेशी कंपनियों की सुविधा के लिए भी कई प्रस्ताव तैयार किए गए हैं, ताकि वे भारत में आकर आसानी से अपने उपक्रम लगा सकें। इस योजना का लक्ष्य देश को मैन्युफैक्चरिंग पावरहाउस बनाना और जीडीपी को बढ़ाना है।
'मेक इन इंडिया' की अन्य अहम बातें
-इस योजना के तहत एक सेल बनाया जाएगा, जो व्यावसायिक इकाइयों के सवालों के जवाब 72 घंटे के अंदर देगा। यह पूरे अभियान की प्रक्रियाओं की निगरानी भी करेगा।
-25 क्षेत्रों की पहचान की गई है जिनमें भारत अग्रणी स्थिति हासिल करने की क्षमता रखता है। यानी 25 क्षेत्रों से जुड़े उत्पादों का निर्माण भारत में करने पर जोर रहेगा। ये सेक्टर हैं- ऑटो
मोबाइल्स, केमिकल्स, आईटी, फॉर्मास्यूटिकल्स, टेक्सटाइल्स, बंदरगाह, एविएशन, लेदर, टूरिज्म, हॉस्पिटैलिटी, वेलनेस, रेलवे, ऑटो पुर्जे, डिजाइन मैनुफैक्चरिंग, रिन्युवल एनर्जी, माइनिंग, बायोटेक्नोलॉजी, इलेक्ट्रॉनिक्स आदि।
-मोदी ने इस अभियान का एलान करते हुए 'जीरो डिफेक्ट, जीरो इफेक्ट' पॉलिसी लागू करने की बात की थी। इसका मतलब है कि ऐसे प्राेडक्ट बनाए जाएं, जिनकी गुणवत्ता अव्वल हो और उनका पर्यावरण पर न के बराबर बुरा प्रभाव हो।
-पूरे अभियान के बारे में विस्तृत जानकारी
www.makeinindia.com पर मिल सकेगी। यह वेबसाइट पूरी तरह कंपनियों के लिए है।
-इस अभियान के अंतर्गत हर साल देश के 1 करोड़ लोगों को रोजगार मिलेगा।
-इसके अंतर्गत डिफेंस सेक्टर के उपकरण के निर्माण पर भी सरकार का अलग से जोर रहेगा। भविष्य में भारत में ही जेट विमान बनाने की योजना है।
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