नई दिल्ली. आम चुनाव से कुछ महीने पहले देश की सत्ता पर काबिज कांग्रेस की अगुवाई वाले
यूपीए गठबंधन में दरारें दिखने लगी हैं। भ्रष्टाचार के अलावा कई मुद्दों को लेकर मतभेद उभरने की वजह से यूपीए 2 से कई साथी पहले ही छिटक चुके हैं। अब
नरेंद्र मोदी को लेकर गठबंधन में
बिखराव के संकेत मिलने लगे हैं। ताज़ा हलचल यूपीए के दो सहयोगियों-राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) और नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) की ओर से मोदी को लेकर दिए गए बयान ने पैदा की है।
6 पार्टियों का गठबंधन रह गया है यूपीए 2
कांग्रेस के सामने मौजूद चुनौतियों का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस समय यूपीए 2 गठबंधन में कांग्रेस के अलावा सिर्फ एनसीपी, आरएलडी, नेशनल कॉन्फ्रेंस, मुस्लिम लीग और झारखंड मुक्ति मोर्चा ही शामिल हैं। इनमें एनसी और एनसीपी भी तेवर दिखाने लगी हैं। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम), डीएमके और तृणमूल कांग्रेस यूपीए 2 गठबंधन से हाथ खींच चुके हैं।
क्या बोले थे प्रफुल्ल?
आंखें दिखा रहे हैं अब्दुल्ला?
यूपीए गठबंधन में कांग्रेस, एनसीपी और राष्ट्रीय लोकदल (आरएलडी) के बाद तीसरी सबसे बड़ी पार्टी (इसके लोकसभा में 3 सांसद हैं) नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता और केंद्रीय मंत्री फारुख अब्दुल्ला ने भी परोक्ष रूप से मोदी का समर्थन करते हुए कहा है कि अगर देश मोदी को प्रधानमंत्री चुनता है तो जनादेश का सम्मान किया जाना चाहिए। अब्दुल्ला सीनियर का यह बयान उनकी पार्टी और कांग्रेस के बीच बढ़ रहे तनाव की तरफ इशारा करता है क्योंकि पिछले साल अक्टूबर में अब्दुल्ला ने कहा था कि देश के धर्मनिरपेक्ष ढांचे के लिए मोदी का प्रधानमंत्री चुना जाना 'खतरनाक' और 'नुकसान' पहुंचाने वाला होगा। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री और फारुख अब्दुल्ला के बेटे उमर अब्दुल्ला ने भी कांग्रेस की परेशानी बढ़ाते हुए कहा है कि उनकी पार्टी जम्मू-कश्मीर में अकेले चुनाव लड़ने पर विचार कर सकती है।
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