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प्री पेड कार्ड यानी फ्रॉड का लाइसेंस?

8 वर्ष पहले
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नई दिल्ली. दुनिया भर के हजारों एटीएम से 4.5 करोड़ डॉलर यानी करीब 2.45 अरब रुपये की चोरी से भारतीय आउटसोर्सिंग पर सवाल खड़े हो गए हैं। इस मामले में अपराधियों ने भारत में भुगतान की प्रोसेसिंग करने वाली दो कंपनियों के सिक्योरिटी सिस्टम को भेदकर रुपये निकाल लिए। ये कंपनियां हैं-पुणे की इलेक्ट्राकार्ड सिस्टम और बेंगलुरु की एनस्टेज। इन दोनों कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय बैंकों ने वीजा और मास्टरकार्ड प्लेटफॉर्म पर प्री पेड कार्ड के जरिए वित्तीय लेन-देन के रखरखाव की जिम्मेदारी सौंपी थी।
कार्ड इंडस्ट्री से जुड़े सूत्रों का कहना है कि इस चोरी से भारतीय आउटसोर्सिंग पर सवाल तो खड़े हो गए हैं, लेकिन इस नुकसान की भरपाई की जिम्मेदारी दोनों भारतीय कंपनियों पर नहीं है। नुकसान की भरपाई वे बीमा कंपनियां करेंगी जिनसे संबंधित बैंकों ने बीमा करवाया हुआ है। इलेक्ट्रीकार्ड सर्विसेज ओपस सॉफ्टवेयर सॉल्युशंस की सहयोगी कंपनी है। इसके प्रमोटर रमेश मेंगावाडे हैं। वहीं, एनस्टेज के प्रमोटर गोविंद सेतलूर हैं। दोनों कंपनियां भारत में इंडसइंड बैंक और करूर वैश्य बैंक के लिए भी काम करती हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ये कंपनियां मिडिल ईस्ट समेत कई देशों के बैंकों के लिए काम करती हैं।
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