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कर्नाटक में मोदी पर भारी पड़े राहुल

8 वर्ष पहले
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बेंगलुरु/नई दिल्ली. कर्नाटक चुनाव में नरेंद्र मोदी पर राहुल गांधी भारी पड़े हैं। दोनों नेताओं ने राज्य में कई सीटों पर प्रचार किया था। राहुल गांधी ने कर्नाटक की 63 सीटों पर प्रचार किया। इनमें से कांग्रेस को 34 सीटें मिलीं। इस तरह से राहुल गांधी को 48 फीसदी कामयाबी मिली। वहीं, नरेंद्र मोदी ने 37 सीटों पर प्रचार किया। इनमें से भाजपा को 13 सीटें मिलीं। इस तरह से मोदी को 35 फीसदी कामयाबी मिली।
कर्नाटक में शानदार जीत के बाद कांग्रेस ने गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी पर सियासी हमला तेज कर दिया। मोदी पर निशाना साधने की केंद्रीय मंत्रियों में होड़-सी मच गई। बारी-बारी से नेताओं ने भाजपा के ब्रांड मोदी पर सवाल उठाए। वहीं राहुल गांधी को श्रेय देने के लिए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह सहित सरकार के तमाम आला नेता आगे आए। हालांकि मोदी पर पूछे गए सवाल पर प्रधानमंत्री ने कोई टिप्पणी नहीं की। उन्होंने कहा कि मैं व्यक्तिगत लोगों पर टिप्पणी नहीं करूंगा लेकिन कर्नाटक की जनता ने भाजपा की विचारधारा को खारिज कर दिया है।

केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने कहा कि मोदी खुद की बनाई हुई संस्था हैं, मैं उनपर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता हूं। लेकिन वे हमेशा खुद को हीरो कहते हैं और कर्नाटक की जनता ने उन्हें जीरो साबित कर दिया। केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद ने कहा कि मोदी की हवा बनाई जा रही थी आखिर मोदी की हवा कहां चली गई? प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री वी नारायण सामी ने भी मोदी पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मोदी ने भाजपा की लुटिया डुबो दी। उन्होंने कहा कि देश भर में कांग्रेस के खिलाफ माहौल बनाया जा रहा था लेकिन कर्नाटक की जनता ने कांग्रेस की नीतियों का साथ दिया। कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने कहा कि मोदी को गुजरात से बाहर कोई नहीं जानता। उन्होंने कहा कि राहुल और मोदी की कोई तुलना नहीं है।
दूसरी तरफ, कर्नाटक में कांग्रेस 7 साल बाद फिर बहुमत के साथ सत्ता में आ गई। भाजपा को जहां अपने पूर्व मुख्यमंत्री येदियुरप्पा का पार्टी छोडऩा भारी पड़ा, वहीं दक्षिण की उसकी पहली सरकार के कार्यकाल में हुए भ्रष्टाचार से भी छवि धूमिल हो गई। येदियुरप्पा ने महज 7 सीटें जीतीं लेकिन 51 पर वह भाजपा की सीधी हार का कारण बनी। वहीं 20 सीटों को उसने परोक्ष रूप से प्रभावित किया। 224 सीटों वाले इस राज्य में कांग्रेस को 121 सीटें मिलीं हैं। प्रधानमंत्री और कांग्रेस ने इसे राहुल की जीत बताया है, वहीं मोदी को लोकल नेता बताते हुए उनकी खिल्ली उड़ाई है। कपिल सिब्बल ने मोदी को जीरो बताया है।
भ्रष्टाचार के मुद्दे का क्या हुआ?
-भाजपा ने केंद्र में भ्रष्टाचार को मुद्दा बनाया, फिर भी कांग्रेस क्यों जीती?
क्योंकि कर्नाटक में स्थानीय मुद्दे हावी रहे। जनता केंद्र से ज्यादा राज्य में भाजपा सरकार के दौरान हुए भ्रष्टाचार से परेशान थी।
-तो क्या भाजपा सिर्फ अपने भ्रष्टाचार से हारी?
भ्रष्टाचार तो मुद्दा था ही, हार का बड़ा कारण येदियुरप्पा की बगावत, परिवारवाद, खदान माफिया को बढ़ावा देना और तीन बार मुख्यमंत्री बदलना रहा।
नतीजों से निकले रोचक तथ्य
-अपवाद छोड़ कर्नाटक का इतिहास रहा है कि यहां उसकी सरकार नहीं बनती जो केंद्र में सत्तारूढ़ हो। अब दोनों जगह कांग्रेस की सत्ता है। तो क्या केंद्र में सत्ता बदलकर कर्नाटक का इतिहास कायम रहेगा या परंपरा बदलेगी?
-भाजपा ने जातियों को इतना मथ दिया कि उसी का जातिवाद उसे महंगा पड़ा। लिंगायत मठों और धर्मगुरुओं को जितना फायदा दिया, उतना ही नुकसान पार्टी को उठाना पड़ा।
येदि ले डूबे
-भाजपा 59 सीटों पर दूसरे नंबर पर रही, जबकि येदियुरप्पा की केजेपी 36 सीटों पर। दोनों पार्टियां 223 में से कुल 95 सीटों पर दूसरे स्थान पर रहीं।
-51 सीटों की स्थिति तो यह थी कि येदि की पार्टी के वोट भाजपा को मिलते तो बाजी पलट जाती। मनहल्ली में भाजपा 125 वोट से हारी। यहां केजेपी को मिले 6 हजार वोट।
अब अगली चुनौती
-भाजपा और उनके सहयोगी दलों की अभी 7 राज्यों में सरकारें हैं। यानी लोकसभा की 122 सीटों पर पकड़ है।
-कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों की 14 राज्यों में सरकारें हैं। यानी उसे लोकसभा की 188 सीटों पर बढ़त है।
-इस साल जिन 6 राज्यों में चुनाव हैं। उनमें से भाजपा दो और कांग्रेस 4 राज्यों में सरकार में है। यहां लोकसभा की कुल 74 सीटें हैं।

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