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रेलगेट-कोलगेट : रेल और कानून मंत्री का इस्तीफा, बंसल हटे, अश्विनी हटाए गए

8 वर्ष पहले
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नई दिल्ली. पूर्व कानून मंत्री अश्विनी कुमार ने शनिवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि उन्होंने कानून मंत्री के पद से इस्तीफा विवाद खत्म करने के लिए दिया है। अश्विनी कुमार ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने उनके खिलाफ कोई टिप्पणी नहीं की है। कुमार ने कहा, 'मैं किस्मत वाला था कि प्रधानमंत्री ने मुझे अपनी कैबिनेट का हिस्सा बनाया। मैंने उनसे मुलाकात कर इस्तीफा सौंपा क्योंकि सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के चलते मैं नहीं चाहता था कि विवाद आगे बढ़े।'
इस बीच, अश्विनी कुमार के इस्तीफे की वजह से दूरसंचार मंत्री कपिल सिब्बल को कानून मंत्रालय की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। वहीं, भूतल परिवहन मंत्री सीपी जोशी को रेल मंत्रालय की अतिरिक्त जिम्मेदारी मिलेगी।
इससे पहले शुक्रवार को केंद्र के दो दागी मंत्रियों को इस्तीफा देना पड़ा। रेल मंत्री पवन बंसल तो आसानी से मान गए लेकिन अंत तक अड़े रहे कानून मंत्री अश्विनी कुमार को हटा दिया गया। कांग्रेस अध्यक्ष शाम लगभग छह बजे प्रधानमंत्री निवास पर पहुंचीं और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से करीब 45 मिनट बात की। सोनिया के प्रधानमंत्री निवास से निकलते ही पवन बंसल को बुलाया गया। वे करीब नौ बजे पहुंचे। बंसल ने ज्यादा देर नहीं लगाई। उन्होंने जैसे ही इस्तीफा सौंपा, वह तुरंत प्रभाव से मंजूर भी हो गया। (पढ़ें, त्यागपत्र एक पाखंड, बर्खास्त करने की हिम्मत दिखाइए)
बंसल अभी अंदर ही थे कि कानून मंत्री अश्विनी कुमार को भी बुला लिया गया। बंसल के विपरीत अश्विनी कुमार लगातार अपनी बेगुनाही बताते रहे। उन्होंने कई बार कहा कि उन्होंने कुछ गलत नहीं किया। तकरीबन आधे घंटे की बातचीत में भी वे तैयार नहीं हुए। इसके बाद प्रधानमंत्री और अहमद पटेल के बीच फिर कुछ देर बातचीत हुई। बाद में सोनिया गांधी से भी चर्चा की गई। अंत में प्रधानमंत्री ने अश्विनी कुमार को हटाए जाने का फरमान सुना दिया। इसके बाद उन्होंने अपना इस्तीफा सौंपा।
कैबिनेट फेरबदल के आसार
दो मंत्रियों के इस्तीफे के बाद अब केंद्रीय मंत्रिमंडल में फेरबदल की संभावना बढ़ गई है। सूत्रों के मुताबिक कुछ मंत्रियों के प्रभार में बदलाव व कुछ नए मंत्रियों को एंट्री दी जा सकती है। रेल मंत्री के लिए कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद से वंचित मल्लिकार्जुन खडग़े का नाम दौड़ में है। गुलाम नबी आजाद व सीपी जोशी के नाम पर भी चर्चा है। जबकि कानून मंत्रालय के लिए कपिल सिब्बल, मनीष तिवारी में से किसी को दिए जाने पर चर्चा है। युपीए-२ की चौथी सालगिरह 22 मई से पहले सरकार को भ्रष्टाचार के मामलों से हुए नुकसान की भरपाई करनी है। उसे हर हाल में अपना चेहरा साफ-सुथरा दिखाना है। द्रमुक और तृणमूल कांग्रेस के सरकार से अलग होने के बाद कई जगह मंत्रिमंडल में पहले से रिक्त है।
दरअसल, भास्कर ने 8 मई को ही यह खबर दी थी कि इन दोनों मंत्रियों के मामले में सरकार कोई फैसला संसद सत्र के अवसान और कर्नाटक के मुख्यमंत्री का चुनाव पूरा होने के बाद ले सकती है। यह भी संभावना व्यक्त की गई थी कि यूपीए-2 में आखिरी मंत्रिमंडल फेरबदल जल्द हो सकता है।
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