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  • ‘Rajiv Gandhi Didn’t Take Calls From President After 1984 Riots Broke Out’

\'खून का बदला खून के नारे से कांग्रेसियों ने शुरू करवाया था 84 का दंगा\'

7 वर्ष पहले
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नई दिल्ली. राहुल गांधी ने हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान यह दावा किया था कि कांग्रेस पार्टी ने 1984 के सिख विरोधी दंगों में हालात को काबू करने की पूरी कोशिश की थी। लेकिन राहुल गांधी का यह दावा सिख समुदाय के कई लोगों को रास नहीं आया है। 1984 में राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह के प्रेस सचिव रहे तरलोचन सिंह (तस्वीर में) ने आरोप लगाया है कि 84 के दंगे 'प्रायोजित' थे और 'सुनियोजित ढंग' से कराए गए थे। तरलोचन का कहना है कि तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी दंगों के दौरान राष्ट्रपति जैल सिंह के फोन रिसीव ही नहीं कर रहे थे।
तरलोचन सिंह का कहना है कि ज्ञानी जैल सिंह फोन कर दंगों से पैदा हुए हालात की जानकारी लेना चाहते थे। तरलोचन सिंह ने कहा, 'इंदिरा गांधी को सुबह गोली मारी गई, लेकिन दंगों का सिलसिला शाम को शुरू हुआ। ज्ञानीजी ने खुद यह जानकारी जुटाई थी कि कांग्रेस के नेताओं ने एक बैठक की थी। बैठक में अरुण नेहरू, दिल्ली के नेता एचकेएल भगत, जगदीश टाइटलर समेत कई नेता शामिल थे। यह मीटिंग राजीव गांधी के कोलकाता (तब कलकत्ता) से लौटने के पहले ही हो गई थी। बैठक में नेताओं ने खून का बदला खून का नारा देने का फैसला किया। इसके बाद आईएनए मार्केट के पास दंगों से जुड़ी पहली हिंसा हुई। अगर वह दंगे अपने आप हुए होते, तो हिंसा सुबह ही शुरू हो गई होती। हालांकि, आधिकारिक तौर पर इसकी कोई घोषणा नहीं हुई थी, लेकिन अनौपचारिक तौर पर दिल्ली में सभी इसके बारे में जानते थे।'
'ज्ञानी जैल सिंह सारी रात फोन पर बात करने की कोशिश करते रहे, किसी ने नहीं सुनी'
तरलोचन सिंह ने बताया कि शाम को जैसे ही राजीव गांधी ने प्रधानमंत्री के तौर पर शपथ ली वैसे ही तत्कालीन राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह को दिल्ली में आगजनी और हत्याओं के बारे में सूचना मिलने लगी। तरलोचन ने आरोप लगाया, 'राष्ट्रपति प्रधानमंत्री से दिल्ली में बड़े पैमाने पर हो रही आगजनी और हिंसा को लेकर बात करना चाहते थे। राष्ट्रपति सारी रात कोशिश करते रहे। लेकिन प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति से संपर्क नहीं किया। किसी ने राष्ट्रपति से संपर्क नहीं किया। अगली सुबह ज्ञानी जैल सिंह ने तत्कालीन गृह मंत्री नरसिंह राव से बात करने की कोशिश की। राष्ट्रपति को बताया गया कि गृह मंत्री अंतिम संस्कार की तैयारी में व्यस्त हैं। राष्ट्रपति को बताया गया कि दिल्ली के लेफ्टिनेंट गवर्नर और दिल्ली पुलिस के कमिश्नर हालात को काबू में लाने की कोशिश कर रहे हैं। अगले दिन न तो प्रधानमंत्री और न ही गृहमंत्री ने इस बात में दिलचस्पी दिखाई कि हिंसा के शिकार लोगों को राहत दी जा सके।'
मेरठ से बुलाई गई थी फौज, लेकिन उन्हें गोली न चलाने को कहा गया था
पूर्व राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह के प्रेस सेक्रेटरी रहे तरलोचन सिंह ने इस बात पर हैरानी जताई है कि दिल्ली की छावनी में सेना मौजूद थी, उन्हें मेरठ से बुला लिया गया था। तरलोचन ने बताया, 'सेना सड़क मार्ग से आई थी। उन्हें आदेश दिया गया था कि गोली नहीं चलानी है, सिर्फ मार्च करना है। दूसरी तरफ दिल्ली पुलिस पूरी तरह से दंगाइयों के साथ थी और उसने कई सिखों को मौत के घाट उतारा।'
आगे की स्लाइड में पढ़िए, ज्ञानी जैल सिंह; तवलीन सिंह और रामचंद्र गुहा ने 1984 के दंगे के बारे में क्या कहा है: