नई दिल्ली. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के 2005 से पहले के नोटों को चलन से बाहर करने के एलान से देश की अंडरग्राउंड इकॉनमी में हड़कंप मचा हुआ है। सरकार की नजरों से दूर चलने वाली अर्थव्यवस्था में शामिल कई लोग अब पुराने नोट को नए नोट से बदलने और पुराने नोटों के सुरक्षित निवेश के रास्ते तलाशने की जुगत में भिड़ गए हैं। आर्थिक जानकारों का कहना है कि अब काला धन रियल एस्टेट, हीरा, सोना और चांदी जैसी चीजों को खरीदने में तेजी से लगाया जाएगा।
एक हजार करोड़ रोजाना का है धंधा
रोजाना एक हजार करोड़ रुपए इधर से उधर पहुंचाने वाले कैश कूरियर (गुजराती भाषा में आंगड़िया) भी परेशान हैं। उनके पास रोजाना इतनी बड़ी मात्रा में रकम आती है कि उनके लिए नए और पुराने को छांटना और पुराने नोटों को नए में बदलना बहुत मुश्किल चुनौती है। उनके लिए रास्ता इसलिए मुश्किल है क्योंकि उनके धंधे का एक बड़ा हिस्सा बैंकों के दायरे से बाहर है। अगर उन्हें अपने पास आने वाली और पहले से इकट्ठा बड़ी रकम को नए नोटों में बदलना है तो उन्हें बैंकों के चक्कर लगाने पड़ेंगे। ऐसा करते हुए उनकी पहचान उजागर होने और उनके धंधे के सरकार की नजरों में सीधे तौर पर आने का खतरा भी है।
सोना, हीरा खरीदने में जुटे लोग
कैश कूरियर के रूप में काम कर रहे कई लोग नकद पैसे का एक हिस्सा खर्च कर सोना या हीरा खरीदने, कमीशन चुका कर पुराने नोटों के बदले चेक हासिल करने के लिए गैर कानूनी तौर पर ऑपरेट करने वाली कुछ कंपनियों से संपर्क कर रहे हैं।
आरबीआई का एलान
आरबीआई के एलान के मुताबिक 1 जुलाई से 500 या 1000 रुपए के 10 पुराने नोट बदलने के लिए पहचान पत्र और पते का सुबूत देना होगा।
(तस्वीर: कुछ साल पहले आई ग्लोबल फाइनेंशियल इंटेग्रिटी की रिपोर्ट में काला धन विदेश भेजने वाले टॉप 20 देश)