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बंसल की उड़ान के साथ बढ़ता गया रिश्तेदारों का रसूख

8 वर्ष पहले
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नई दिल्ली.रेल रिश्वत कांड में मंत्री की कुर्सी गंवा चुके पवन कुमार बंसल के राजनीतिक जीवन और उनसे जुड़े रिश्तेदारों के कारोबार पर नजर डालने पर दिलचस्प तस्वीर उभरती है। (पढ़ें, त्यागपत्र एक पाखंड, बर्खास्त करने की हिम्मत दिखाइए)
यूथ कांग्रेस के महासचिव से लेकर रेल मंत्री की कुर्सी तक का सफर तय कर चुके पवन बंसल 80 के दशक में चंडीगढ़ की राजनीति में खासे सक्रिय हो चुके थे। 1991 में उन्होंने यहीं से पहला लोकसभा चुनाव जीता था। इससे पहले 1984 में राज्यसभा सांसद चुने जा चुके थे। इसी बीच 1990 में पवन कुमार बंसल के भांजे विजय सिंगला और बहनोई मिठन लाल सिंगला ने जगन इंडस्ट्रीज लिमिटेड नाम की फर्म के जरिए कारोबार की दुनिया में कदम रखा था। इसके साथ ही जैसे-जैसे बंसल का राजनीतिक कद बढ़ता गया उनके रिश्तेदारों का रसूख (सात साल में ही जीरो से 152 करोड़ की हुई बंसल के बेटों की कंपनी!) और कारोबार दिन दूना रात चौगुना बढ़ता गया।
आगे की स्लाइड में पढ़िए, बंसल कुनबे और रिश्तेदारों के बारे में:
(तस्वीर: इस साल रेल बजट पेश करने से पहले परिवार के साथ नाश्ता करते पवन बंसल)
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