नई दिल्ली. केंद्र सरकार से दो मंत्रियों की विदाई के बाद अब खाद्य सुरक्षा और भूमि अधिग्रहण जैसे अहम विधेयकों की राह साफ हो सकती है। केंद्र सरकार इन दोनों विधेयकों को कानूनी शक्ल देने के लिए सभी संभावित विकल्पों पर गौर कर रही है।
विधेयक पर गतिरोध न हो, इसके लिए नए सिरे से विपक्ष से बात की जा सकती है। खाद्य व नागरिक आपूर्ति मामलों के मंत्री प्रो केवी थॉमस ने कहा कि हमें खाद्य सुरक्षा विधेयक को मूर्त रूप देना है। इसके लिए सभी विकल्प खुले हैं। अध्यादेश लाकर ऐसा करना पड़े तो भी सरकार तैयार है। उधर कांग्रेस प्रवक्ता भक्तचरण दास ने कहा कि खाद्य सुरक्षा कानून देश की सबसे बड़ी जरूरत है। देश में अभी भी कई इलाकों में लोग भूख के शिकार हो रहे हैं। ऐसे में पार्टी खाद्य सुरक्षा को कानूनी जामा पहनाने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी। उन्होंने भूमि अधिग्रहण विधेयक को भी बेहद जरूरी बताया।सरकार के सूत्रों का कहना है कि दो मंत्रियों के इस्तीफे के बाद विपक्ष को भी अब अपना रुख नरम करना होगा। भूमि अधिग्रहण को पारित कराने का भरोसा विपक्ष पहले भी दे चुका है। ऐसे में इस पर कोई गतिरोध फिलहाल नहीं नजर आ रहा है। खाद्य सुरक्षा कानून में भी संशोधनों की मांग विपक्ष की ओर से जरूर हो रही है लेकिन इसका विरोध करने का साहस विपक्ष में नहीं है।
खाद्य सुरक्षा विधेयक यूपीए दो सरकार का चुनावी ट्रंप कार्ड भी बनना है। ऐसे में सरकार हर तरह का दांव खेलने को तैयार है। सरकार अगर अध्यादेश लेकर आती है तो भी कोई राजनीतिक दल इसका विरोध शायद ही कर पाएं। हालांकि यूपीए के घटक व सरकार में सहयोगी एनसीपी का मानना है कि विधेयक चर्चा के बाद संसद में लाया जाए। उन्होंने अपनी मंशा से प्रधानमंत्री को भी अगवत करा दिया था। उनका सुझाव स्वीकार हुआ तो अब इसे मानसून सत्र में ही पारित कराने का प्रयास होगा।
रीयल एस्टेट बिल पर आवास सहमति बनाने की कोशिश
आवास मंत्रालय ने रीयल एस्टेट बिल को अगले सत्र में संसद में पेश करने का लक्ष्य तय किया है और उस पर नए सिरे से कवायद तेज कर दी है। फिलहाल यह मामला कैबिनेट में लंबित है। बीते सत्र में यह संसद में इसलिए नहीं आ पाया क्योंकि शहरी विकास मंत्री कमलनाथ का कहना था कि उन्होंने अभी इस बिल को पूरी तरह नहीं पढ़ा है। रीयल एस्टेट बिल की नीतियों का संबंध उनके मंत्रालय से भी है इसलिए यह जरूरी समझा गया कि पहले उनकी सलाह ले ली जाए। सूत्रों के मुताबिक कैबिनेट में इस बिल पर उभरे मतभेदों को देखते हुए आवास मंत्रालय ने इस पर नए सिरे से सहमति बनाने की कवायद शुरू की है। इसी के तहत इस बिल में व्यावसायिक संपत्तियों को लेकर कुछ नहीं कहा जा रहा है। बिल को पूरी तरह आवास के इर्द-गिर्द रखा जा रहा है। खासकर कारपेट एरिया, विभिन्न तरह के भ्रामक इश्तहारों पर रोक, एक परियोजना का पैसा दूसरी योजना में न लगाना और समय पर प्रोजेक्ट पूरा न करने पर आर्थिक दंडात्मक प्रावधान तक ही इस बिल को सीमित रखा जाएगा। इसमें किसी भी तरह की व्यावसायिक संपत्तियों को लेकर कुछ नहीं कहने का निश्चय किया गया है। माना जा रहा है कि इस नई नीति के तहत आवास मंत्रालय अपने बिल को कैबिनेट से संस्तुति दिलाते हुए संसद में स्वीकृति के लिए पेश कर सकता है।