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माओवादी लीडर गणपति बना मोस्ट वॉन्टेड अपराधी, पौने तीन करोड़ का इनाम घोषित

7 वर्ष पहले
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(फाइल फोटोः मुपल्ला लक्ष्मण राव उर्फ गणपति)
नई दिल्ली. देश में बढ़ते माओवाद से निपटने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों ने कवायद तेज कर दी हैं। इसी के चलते सीपीआई (माओवादी) के चीफ मुपल्ला लक्ष्मण राव उर्फ गणपति पर इनामी राशि बढ़ाकर दो करोड़ सड़सठ लाख कर दी गई है। इस ऐलान के बाद गणपति का नाम भारत के मोस्ट वांटेड अपराधियों में आ गया है। इसके साथ ही कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया की सेंट्रल कमेटी मेम्बर्स पर भी ईनामी राशि 21 करोड़ कर दी गई है। नक्सली लीडर गणपति की गिरफ्तारी और उसकी गतिविधियों पर लगाम कसने के लिए केंद्र सरकार एनआईए से भी मशविरा कर रही है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि गणपति की गिरफ्तारी पर एनआईए द्वारा घोषित इनामी राशि भी बढ़ाई जा सकती है। फिलहाल, एनआईए ने गणपति पर 15 लाख का इनाम घोषित कर रखा है।
किसने, कितना घोषित किया है इनाम-
महाराष्ट्र सरकार द्वारा गणपति की गिरफ्तारी पर एक करोड़ का इनाम घोषित करने के बाद उसकी सूचना या गिरफ्तारी की इनामी राशि में ये इजाफा हुआ है। छत्तीसगढ़ गृह मंत्रालय के सूत्रों ने भी गणपति की इनामी राशि एक करोड़ करने के संकेत दिए हैं। नक्सल प्रभावित इन राज्यों के इस कदम के बाद गणपति अब दो करोड़ सड़सठ लाख का इनामी नक्सली बन गया है। जानकारी के मुताबिक, गणपति छत्तीसगढ़ में बस्तर के अबूझमाड़ जंगल से अपनी गतिविधियां चलाता है जबकि पोलित ब्यूरो के अन्य सदस्य छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, ओडिशा, बिहार और झारखंड के नक्सल प्रभावित इलाकों में कार्यवाही करते हैं।

कमेटी के हर सदस्य पर 1 करोड़ का इनाम-
भाकपा (माओवादी) की सेंट्रल कमेटी के हर सदस्य पर एक करोड़ के इनाम के चलते कमेटी पर भी कुल 21 करोड़ का इनाम है। हालांकि, पिछले वर्षों में कमेटी सदस्यों की संख्या 39 से घटकर 19 होने पर इस राशि में कमी भी हुई है। गौरतलब है कि महाराष्ट्र सरकार, पोलित ब्यूरो और सेंट्रल कमेटी के किसी भी सदस्य की जानकारी देने पर या गिरफ्तारी करवाने पर 60 लाख का इनाम देने की ऐलान पहले ही कर चुकी है।
अगर आत्मसमर्पण करें, तो मिलेगी राशि
केंद्रीय गृह मंत्रालय के मुताबिक, इन नक्सलियों में से कोई भी आत्मसमर्पण करता है तो ये इनामी राशि उसे दी जाएगी। सरकार का ये कदम नक्सल प्रभावित इलाकों में विकास करने और माओवादी संगठनों की गतिविधियों पर अंकुश लगाने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने भी पिछले दिनों कहा है कि अगर नक्सली संगठन हिंसा छोड़ने को तैयार हैं तो सरकार उनसे बातचीत को राजी है।