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अब दस्त नहीं ले पाएगी नौनिहालों की जान

8 वर्ष पहले
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नई दिल्ली. जानलेवा पेचिस और नौनिहालों की मौत के लिए जिम्मेदार रोटा वायरस का एक भारतीय दवा कंपनी ने सबसे सस्ता टीका ईजाद कर लिया है। सरकारी संस्था डिपार्टमेंट ऑफ बॉयोटेक्नोलॉजी (डीबीटी) और टीका कंपनी ‘भारत बॉयोटेक’ के साझा शोध के लिए तीसरे और अंतिम क्लीनिकल ट्रायल पूरे हो गए हैं। यह टीका सिर्फ पचास रुपए की कीमत में जल्द बाजार में उपलब्ध हो सकता है। भारत में जानलेवा पेचिस से हर वर्ष एक लाख से ज्यादा शिशुओं की मौत हो जाती है।
मंगलवार को पत्रकारों से बातचीत में डिपार्टमेंट ऑफ बॉयोटेक्नोलॉजी के सचिव डॉ. के विजय राघवन ने बताया कि साझा अभियान के तहत तैयार इस टीके के शिशुओं पर क्लीनिकल ट्रायल सफल साबित हुए हैं। बेहतर देखरेख में देश के लगभग 6799 शिशुओं पर किए गए ट्रायल के दौरान पेचिस से होने वाली मौतों को रोकने में कामयाबी मिली है। डॉ. राघवन ने आगे बताया कि भारत बॉयोटेक कंपनी इस नए टीके को तैयार करेगी, जिसकी कीमत मात्र पचास रुपए होगी। बाजार में मौजूद अन्य रोटा वायरस निरोधक टीकों की कीमत 1000-1200 रुपए है। डिपार्टमेंट ऑफ बायोटेक्नोलॉजी के पूर्व सचिव रह चुके डॉ. एमके भान ने बताया कि नए टीके के सफल परीक्षण के बाद जुलाई महीने में इसे बाजार में बिक्री की अनुमति के लिए ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीसीजीआई) के पास भेजा जाएगा। अगले 6-9 महीने के भीतर नया टीका आम लोगों की पहुंच में आ जाएगा।
इसलिए जरूरी है बच्चों को रोटा वायरस से बचाना?
सरकारी आंकड़ों के अनुसार हर साल भारत में लगभग एक लाख बच्चों की मौत रोटा वायरस संक्रमित पेचिस से हो रही है। पांच से से कम उम्र के 242 बच्चों में से एक की मौत का कारण यही वायरस है। पिछले साल ब्रिटेन की प्रतिष्ठित मेडिकल पत्रिका ने दावा किया था कि 2008 में रोटा वायरस संक्रमित दस्त की वजह से भारत में 98,621 शिशुओं की मौत हुई। शिशुओं को इस वायरस से बचाने के लिए जन्म के बाद 6वें, 10वें और 14वें हफ्ते में रोटा वायरस निरोधक टीका लगाना जरूरी है। बहुत महंगा होने और देसी टीका उपलब्ध नहीं होने की वजह से फिलहाल राष्ट्रीय टीकाकरण अभियान के तहत इस टीके को शामिल नहीं किया गया है।