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डाउनलोड करेंदिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने समलैंगिकता को अपराध करार देने वाले अपने फैसले में किसी भी तरह के बदलाव करने से इन्कार कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केंद्र सरकार और समलैंगिक संगठनों की ओर से दायर उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें पुनर्विचार की बात कही गई थी।
जज एच एल दत्तू और एस जे मुखोपाध्याय की पीठ ने ये फैसला किया कि दिसंबर 2013 में सुनाए गए फैसले पर फिर से विचार किया जाए या नहीं। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के 2009 के फैसले को पलटकर धारा 377 को वैध करार दिया था। कोर्ट के ताजा फैसले से समलैंगिक समर्थकों को तगड़ा झटका लगा है।
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