(फाइल फोटोः याकूब मेमन)
नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने 1993 के मुंबई बम धमाकों के दोषी याकूब अब्दुल रज्जाक मेमन की फांसी पर लगी रोक जारी रखते हुए महाराष्ट्र सरकार एवं अन्य को नोटिस जारी किए।
जस्टिस अनिल आर दवे, जस्टिस जस्ती चेलमेश्वर और जस्टिस कुरियन जोसेफ की बेंच ने ओपन कोर्ट में सुनवाई के दौरान महाराष्ट्र सरकार, सीबीआई और विशेष कार्य बल (एसटीएफ) को नोटिस जारी करके जवाब-तलब भी किया। मामले की सुनवाई 28 जनवरी 2015 को होगी।
क्या है पूरा मामलाः ओपन कोर्ट में मेमन की याचिका
- मेनन को सुप्रीम कोर्ट ने ही मौत की सजा सुनाई थी, लेकिन बीते सितंबर एक अन्य आदेश में कोर्ट ने फांसी की सजा पा चुके अपराधियों की लंबित दया याचिकाओं के मामले में दिए अपने फैसले में ओपन कोर्ट यानी खुली अदालत का गठन किया था।
- मेमन ने इसी फैसले को आधार बनाकर खुली अदालत में सुनवाई की मांग करते हुए नई पुनर्विचार याचिका दाखिल की थी, जिस पर नवंबर में सुनवाई होनी थी, लेकिन जस्टिस उदय उमेश ललित ने खुद को सुनवाई से अलग कर लिया था।
- जस्टिस ललित ने कहा था कि 'वह बतौर वकील धमाकों से जुड़े मामले में कुछ अन्य लोगों की पैरवी कर चुके हैं।'
- इसके बाद जस्टिस दवे ने मामले को किसी ऐसी बेंच के सामने लगाने का निर्देश दिया, जिसमें ललित सदस्य न हों।
मेमन की दलील- 19 साल से जेल में, दोबारा सजा क्यों
मेमन ने अपनी याचिका में फांसी की सजा निरस्त करने की मांग करते हुए दलील दी है कि वह करीब 19 साल से जेल में है जो उम्रकैद की सजा के बराबर है, ऐसे में उसे फांसी नहीं दी जा सकती, क्योंकि इससे सजा दोहरी हो जाएगी। एक अपराध के लिए दो सजा नहीं हो सकती।