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  • दो साल पहले 9 फरवरी को दी गई थी अफजल गुरु को फांसी

कांग्रेस के नेता शशि थरूर बोले- अफजल गुरु को फांसी देना गलत था

6 वर्ष पहले
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नई दिल्ली. अफजल गुरु के शव को उनके परिवार को लौटाने को लेकर जम्मू-कश्मीर में विरोध प्रदर्शन के दौरान एक युवक की मौत हो गई, जबकि दूसरा घायल हो गया। प्रदर्शन बारामूला में हो रहा था। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए गोलियां चलाई थीं। 2001 में संसद पर हुए हमले के दोषी अफजल गुरु को 9 फरवरी, 2013 को दिल्ली की तिहाड़ जेल में फांसी दी गई थी और उसके शव को भी वहीं दफन कर दिया गया था। दूसरी ओर, कांग्रेस के सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री शशि थरूर ने अफजल गुरु को फांसी दिए जाने पर सवाल उठाए हैं। थरूर ने टि्वटर पर अपने कमेंट में न केवल अफजल को फांसी देने को गलत बताया, बल्कि यह भी कहा कि मामले को गलत तरीके से हैंडल किया गया। दो साल पहले 9 फरवरी को ही संसद पर आतंकी हमले में दोषी अफजल को फांसी दी गई थी। वहीं, राज्यसभा चुनाव में निर्दलीय विधायक का समर्थन पाने के लिए पांच कांग्रेसी विधायकों पर अफजल को फांसी दिए जाने के मामले में लिखित माफी मांगने का आरोप लगा है।
अफजल की फांसी को लेकर थरूर ने ट्विटर पर लिखा, "मैं मानता हूं कि फांसी देना गलत था और इसे गलत तरीके से हैंडल किया गया। परिवार को पहले से बताने के अलावा अंतिम बार मिलने का वक्त दिया जाना चाहिए था। साथ ही, फांसी के बाद शव को वापस करना चाहिए था।" गौरतलब है कि जिस वक्त अफजल को फांसी दी गई थी, उस वक्त केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी। ऐसे में, कांग्रेस के ही एक सांसद द्वारा दो साल बाद पार्टी की सरकार के ही फैसले पर सवाल खड़ा करना नए विवाद को हवा दे सकता है।
कानून का पालन करते हुए दी गई फांसी: कांग्रेस
थरूर के ट्वीट पर कांग्रेस की प्रतिक्रिया भी आ गई है। पार्टी के प्रवक्ता अजय कुमार ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मद्देनजर सभी कानूनी प्रावधानों का ध्यान रखते हुए अफजल को फांसी दी गई थी।
गुलाम नबी आजाद को राज्यसभा भेजने के लिए मांगी गई माफी
कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद को राज्यसभा चुनाव जितवाने के लिए जम्मू-कश्मीर में पांच कांग्रेसी विधायकों ने अफजल गुरु को फांसी दिए जाने पर माफी मांगी है। विधायकों ने समर्थन के लिए अफजल गुरु की दूसरी बरसी के एक दिन पहले रविवार को लिखित माफी मांगी।
राज्यसभा के लिए मतदान के वक्त पीडीपी और बीजेपी के साथ आने के बाद कांग्रेस नेता आजाद के लिए एक निर्दलीय विधायक का समर्थन आवश्यक हो गया था। जम्मू-कश्मीर में पिछले वर्ष हुए विधानसभा चुनाव में 12 सीट जीतने वाली कांग्रेस उम्मीदवार आजाद के पास अपनी पार्टी के अलावा 15 नेशनल कॉन्फ्रेंस, दो निर्दलीय विधायकों का समर्थन था। लेकिन पीडीपी-बीजेपी के साथ आने के बाद कांग्रेस-एनसी ने निर्दलीय विधायक शेख अब्दुल रशीद का समर्थन मांगा।
'सेव अफजल गुरु रेज़्युलेशन' का संचालन करने वाले रशीद ने समर्थन देने से पहले 2013 में अफजल गुरु को फांसी पर लटकाए जाने के लिए कांग्रेस से लिखित माफी की शर्त रखी। हालांकि, कांग्रेस की ओर से कोई माफी नहीं मांगी गई, लेकिन उसके पांच विधायकों ने अफजल की फांसी के लिए लिखित माफी मांगी। माफीनामे में स्वीकारा गया कि फांसी से पहले अफजल को उसके परिवार से न मिलने देना एक गलती थी। माफीनामे में यह भी लिखा गया कि अफजल की फांसी के बाद शव परिवार को लौटाया जाना चाहिए था। माफीनामा देने वाला पांच विधायकों के नाम विकर रसूल (बनिहाल), जीएम सरोरी (इंद्रेवाल), मोहम्मद अमीन भट्ट (देवसर), हाजी अब्दुल रशीद (सोपोर) और गुलजार अहमद वानी (शानगुस) के नाम शामिल हैं।
आगे पढ़ें, कौन था अफजल गुरु और जम्मू-कश्मीर में सोमवार को रहा बंद जैसा माहौल...