बेंगलुरू. सिद्धरमैया कर्नाटक के नए मुख्यमंत्री हैं। उन्होंने सोमवार को पद और गोपनीयता की शपथ ले ली। वे राज्य के 22वें मुख्यमंत्री हैं।
शपथ ग्रहण समारोह कांतिराव स्टेडियम में आयोजित हुआ, जहां सिद्धरमैया के गृह जिले मैसूर और आस-पास के इलाकों के लगभग 50 हजार लोग शामिल हुए। सिद्धरमैया को गत 10 मई को कांग्रेस विधायक दल का नेता चुना गया था।
जेडीएस से आए है कांग्रेस में आए हैं सिद्धरमैया
पिछड़े वर्ग से ताल्लुक रखने वाले सिद्धरमैया का कर्नाटक में पुख्ता जनाधार है। वे कर्नाटक में पिछली भाजपा सरकार के दौरान कांग्रेस के संघर्ष का केंद्र बिंदु बने थे। उनकी अगुवाई में पार्टी ने सूबे में कई आंदोलन किए। जेडीएस से कांग्रेस में आए सिद्धरमैया पूर्व में सूबे के उप-मुख्यमंत्री रह चुके हैं। कर्नाटक में कांग्रेस की शानदार जीत के बाद उन्होंने खुद को मुख्यमंत्री बनाए जाने का दावा पेश किया था। सिद्धरमैया का दावा था कि प्रदेश में ज्यादातर विधायक उनके साथ हैं। गुप्त मतदान में उन्होंने अपना दावा आला नेतृत्व के सामने पुख्ता कर दिया। 64 साल के सिद्धरमैया कर्नाटक की राजनीति के धुरंधर माने जाते हैं। सिद्धरमैया 6 बार विधानसभा चुनाव जीत चुके हैं। वे जेएच पटेल, रामकृष्ण हेगड़े और धरम सिंह की अगुवाई में बनी सरकारों में अहम मंत्री पद संभाल चुके हैं। सिद्धरमैया दो बार उपमुख्यमंत्री भी रहे हैं। हालांकि, मूल रूप से जनता दल के नेता रहे सिद्धरमैया 1999 में हुए विभाजन के बाद जनता दल सेकुलकर के साथ आ गए थे। लेकिन जेडीएस-कांग्रेस की गठबंधन सरकार में मुख्यमंत्री न बनाए जाने से नाराज सिद्धरमैया ने जेडीएस को अलविदा कहकर 2006 में कांग्रेस का दामन थाम लिया था। मैसूर के वरुणा इलाके में जन्मे सिद्धरमैया राजनीति में आने से पहले वकालत करते थे। 1983 में पहली बार सिद्धरमैया चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे थे। सिद्धरमैया के दो बेटे हैं। कर्नाटक में इस बार हुए विधानसभा चुनाव से पहले सिद्धरमैया ने यह ऐलान किया था कि यह उनका आखिरी चुनाव है और इसके बाद वे चुनावी राजनीति में नहीं रहेंगे।