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बीच सत्र में संस्कृत लागू करने से छात्रों को न हो नुकसान

7 वर्ष पहले
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नई दिल्ली. केंद्रीय विद्यालयों में तीसरी भाषा के रूप में संस्कृत को अनिवार्य बनाने के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से जवाब मांगा है। उसने पूछा है कि इसका बोर्ड परीक्षा दे रहे छात्रों पर क्या असर होगा? साथ ही हिदायत दी कि उसके इस फैसले से बच्चों को कोई नुकसान नहीं होना चाहिए।
कोर्ट ने केंद्र को जवाब के लिए 16 दिसंबर तक का वक्त दिया है। केंद्र ने 11 नवंबर को केंद्रीय विद्यालयों में कक्षा छह से आठ तक तीसरी भाषा के रूप में जर्मन की जगह संस्कृत पढ़ाने का आदेश जारी किया था। कुछ अभिभावकों ने इसे चुनौती दी। इस पर सरकार ने शुक्रवार को कोर्ट से कहा था कि इस सत्र में बच्चों को संस्कृत की परीक्षा नहीं देनी होगी। और वे चाहें तो जर्मन को अतिरिक्त विषय के तौर पर चुन सकते हैं।