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सुप्रीम कोर्ट ने तय की पुलिस एनकाउंटर की गाइडलाइंस, आरोपी पुलिसवालों का रूकेगा प्रमोशन

7 वर्ष पहले
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नई दिल्‍ली: सुप्रीम कोर्ट ने फर्जी पुलिस एनकाउंटर मामलों पर मंगलवार को ऐतिहासिक फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि फर्जी एनकाउंटर के आरोपी पुलिसवालों को न तो बहादुरी से जुड़े पुरस्‍कार दिए जाएं और न ही उन्‍हें प्रमोट किया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस के लिए इस दिशा में कुछ गाइडलाइंस जारी किए हैं। मानवाधिकार संगठनों और आम लोगों द्वारा पुलिस पर फर्जी मुठभेड़ के आरोपों के मद्देनजर सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला किया है। हालांकि, कोर्ट ने मंगलवार को यह भी कहा कि राष्‍ट्रीय मानव‍ाधिकार आयोग को पुलिस एनकाउंटर से जुड़े हर केस में दखल नहीं देनी चाहिए। कोर्ट के मुताबिक, आयोग तभी कोई कदम उठाए, जब एनकाउंटर के फर्जी होने को लेकर पुख्‍ता आरोप हों।
सुप्रीम कोर्ट की ओर से पुलिस एनकाउंटर के लिए तय मुख्‍य गाइडलाइंस
-एनकाउंटर के बाद सीआरपीसी के सेक्‍शन 176 के तहत तुरंत शुरू हो मजिस्‍ट्रेट स्‍तर की जांच।
-एनकाउंटर के तुरंत बाद पुलिसकर्मियों को अपने असलहे जमा करवाने होंगे।
-सीआईडी या अलग पुलिस स्‍टेशन द्वारा एनकाउंटर की स्‍वतंत्र जांच।
-एनकाउंटर के तुरंत बाद पुलिसवालों के लिए किसी तरह के इनाम या प्रमोशन का एलान न हो
-पुलिस को उन जानकारियों का खुलासा करना होगा, जिनके आधार पर एनकाउंटर किया गया।
-अगर किसी को एनकाउंटर के फर्जी होने का शक हो तो वह सेशन कोर्ट में शिकायत दर्ज करा सकता है।
क्‍या कहते हैं आंकड़े
2013 के सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, बीते 4 सालों में पूरे भारत में फर्जी एनकाउंटर से जुड़े 555 मामले दर्ज किए गए। इनमें से यूपी में 138, मणिपुर में 62, असम में 52, पश्‍च‍िम बंगाल में 35, झारखंड में 30, छत्‍तीसगढ़ में 29, ओडिशा में 27, जम्‍मू-कश्‍मीर में 26, तमिलनाडु में 23 और मध्‍य प्रदेश में 20 मामले शामिल हैं। कुल 555 में से 144 मामलों का निस्‍तारण हो चुका है। एनकाउंटर के मामले में टॉप 10 स्‍टेट में से पांच नक्‍सल प्रभावित हैं।