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क्या सुधरेंगे ई ग्रेड के 2000 स्टेशन और स्पेशल ट्रेनों का सफर?

9 वर्ष पहले
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हर बजट अब राजनीतिक ही होता है। रेल मंत्री जो बजट पेश करने वाले हैं, उसमें ऐसे बिंदु होंगे, जिनका अगले साल आम चुनावों से गहरा रिश्ता हो। इसलिए इस बात पर कयास लगाने की आवश्यकता नहीं कि मंत्री रेल बजट में क्या सुविधाएं घोषित करेंगे और उनका कितना दाम यात्रियों को चुकाना पड़ेगा। यह तय है पैसे के अभाव का जितना रोना रोया जा रहा है, किराए में उतनी बढ़ोतरी नहीं होगी। इसलिए नहीं कि रेलवे किराए में वृद्धि सरकार नहीं करना चाहती है और उसे यात्रियों की खाली होती जेबों की चिंता है। ऐसा इसलिए कि वृद्धि के लिए अभी पूरा साल पड़ा है, फिर अभी से यात्रियों को एक बारगी झटका क्यों दिया जाए। लेकिन राजनीतिक रूप से उपयुक्त बजट बनाने के बावजूद बहुत कुछ है, जिसका राजनीति से इतना निकट का संबंध नहीं कि अगले चुनाव पर कोई असर पड़े। उन पर तो रेल मंत्रालय कुछ संवेदनात्मक रवैया अपना सकता है। कुछ ऐसे क्षेत्र हैं, जिनको बिना बड़े बजट के ही सुधारा जा सकता है।
आगे की स्लाइड में पढ़िए, क्या हाल हैं ई ग्रेड स्टेशनों के और स्पेशल ट्रेन का सफर कैसे होता है 'स्पेशल' :
(लेखक वरिष्ठ राजनीतिक टिप्पणीकार हैं)