(फाइल फोटो)
फ्रैंकफर्ट. प्रधानमंत्री
नरेंद्र मोदी ने निवेशकों को भरोसा दिलाया है कि उनकी सरकार अनावश्यक कानूनों और नियमों को खत्म कर देश में उद्योग धंधे लगाने की राह आसान बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने वॉल स्ट्रीट जर्नल के लिए लिखे लेख में यह भी कहा कि भारत में बदलाव शुरू हो गए हैं, अगली बार जब आप भारत दौरे पर आएंगे, तो खुद इस बदलाव को महसूस करेंगे।
फ्रैंकफर्ट से अमेरिका रवाना होने के पहले से मोदी ने अपने लेख में कहा कि उनकी सरकार ज्यादा पारदर्शिता और अधिक जवाबदेही के साथ इस दिशा में काम करेगी। उन्होंने इस अवसर पर भारत के विकास में अमेरिका के योगदान के महत्व को स्वीकार करते हुए कहा कि भारत की तरक्की में उसका बड़ा योगदान रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि हम भारत में अंतर्राष्ट्रीय स्तर की आधारभूत संरचना का निर्माण करेंगे ताकि विकास को गति दी जा सके और लोगों की मूल आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके। हम अपने कस्बों और शहरों को रहने के एक बेहतर स्थान और गांवों को बदलाव और प्रगति का सूचक बनाएंगे। उन्होंने कहा कि मेक इन इंडिया अभियान उनकी सरकार की प्रतिबद्धता है जिसमें भारत को विनिर्माण का एक बड़ा केंद्र बनाए जाने के लिए निवेशकों को आमंत्रित किया गया है। उन्होंने कहा इस सपने को मूर्त रूप देने के लिए जो कुछ किया जाना है हम करेंगे।
युवाशक्ति की ऊर्जा और उत्साह सबसे बड़ी ताकत
प्रधानमंत्री ने कहा कि बहुमत वाली सरकार के नेतृत्व में आज भारत प्रचुर संभावनाओं और आत्मविश्वास से लबरेज देश के रूप में उभर रहा है। उसकी युवाशक्ति की ऊर्जा, उत्साह और उद्यमशीलता देश की सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने कहा कि आज के समय में देश की अस्सी करोड आबादी 35 वर्ष की आयु से कम की है जिसके हौसलों के दम पर भारत एक जवाबदेह आर्थिक विकास के पथ पर चलने के लिए तैयार खड़ा है। मोदी ने कहा कि भारत वैश्विक सहयोग पर विश्वास रखने वाला देश है इसलिए वह अपने विकास में सबकी साझेदारी चाहता है। इस क्रम में हम कारोबार के क्षेत्र में अपने नए विचारों, अनुभव, अन्वेषण और अनुसंधान को सबके साथ बांटना चाहते हैं। अगली बार जब आप भारत दौरे पर आएंगे तो खुद इस बदलाव को महसूस करेंगे।
भारत-अमेरिका स्वाभाविक सहयोगी-
भारत और अमेरिका के रिश्तों की अहमियत पर प्रकाश डालते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि देश की प्रगति में अमेरिका का हमेशा से बड़ा योगदान रहा है। दोनों देश स्वाभाविक रूप से वैश्विक सहयोगी बन चुके हैं। साझा मूल्य, समान हित और एकदूसरे का पूरक होने की क्षमता दुनिया के सबसे पुराने और सबसे बड़े लोकतंत्रों के बीच स्वाभाविक साझेदारी की नींव है। दोनों देश मिलकर एशिया प्रशांत क्षेत्र में स्थायी शांति और सुरक्षा, साइबर अपराधों के खात्मे, अंतरिक्ष अभियानों में साझेदारी, आतंकवाद और कट्टरवाद के खिलाफ अभियान में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका की साझी सोच और क्षमताओं को विश्व में लोगों का जीवन स्तर सुधारने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि हालांकि हमारे देशों के मूल्यों और स्थितियों में काफी असमानताएं हैं लेकिन हममें कुछ अनूठी समानताएं भी हैं जिसका इस्तेमाल हम वैश्विक विकास के लिए कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि वैश्विक चुनौतियों से निबटने के लिए हमें एक-दूसरे की सोच को पूरी संवदेनशीलता के साथ जानना-समझना भी जरूरी है। प्रधानमंत्री ने कहा कि दोनो ही देश-दुनिया के बड़े लोकतंत्र है यह एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें मानवता के विकास के लिए अनुकूल ओर सबसे बेहतर अवसर मौजूद हैं।
साझा ताकत पर होगी ओबामा से चर्चा
मोदी ने कहा कि वह ओबामा से इस बारे में चर्चा करेंगे कि कैसे दोनों देशों की साझा ताकत का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकता है ताकि दोनों देशों और दुनिया के हित में इस साझेदारी को अगले स्तर में ले जाया जा सके। उन्होंने विश्वास जताया कि उनकी यह यात्रा दोनों देशों के रणनीतिक रिश्तों में एक नए अध्याय की शुरुआत करेगी।
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