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आईआईटी के छात्रों ने निकाला डीजल से होने वाले प्रदूषण का तोड़

आईआईटी दिल्ली के पूर्व छात्रों ने डीजल जेनरेटर से निकलने वाले धुएं से स्याही और पेंट बनाने का नुस्खा निकाला है।

Danik Bhaskar | Feb 04, 2018, 08:21 PM IST

देश के ज्यादातर घरों में 24 घंटे बिजली नहीं आती। ऐसे में डीजल से चलने वाले जेनरेटर पावर बैकअप का काम करते है। अंधेरे से बचने के लिए लोग इन जेनरेटरों का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन यही जेनरेटर बड़े शहरों की हवा में जहर घोल रहे हैं। दिल्ली एनसीआर में सरकार ने फरमान सुनाया है कि डीजल जेनरेटर न चलाएं। अब लोग करें तो क्या करें? सरकार ने तो हुक्म सुना दिया। लेकिन क्या बच्चे अंधेरे में पढ़ें? क्या महिलाएं किचन में मोमबत्ती जलाकर खाना पकाएं? इतनी सर्दी में क्या ठंडे पानी से नहाएं? सरकार न पूरी बिजली देगी और न ही पावर बैकअप का कोई साफ सुथरा विकल्प देगी। ऐसे में अब आईटी दिल्ली के कुछ छात्रों ने उपाय निकाला है।


जेनरेटर के धुएं से बनेगी स्याही और पेंट
आईआईटी दिल्ली के पूर्व छात्रों ने डीजल जेनरेटर से निकलने वाले धुएं से स्याही और पेंट बनाने का नुस्खा निकाला है। इन्होंने एक ऐसा उपकरण बनाया है जो जेनरेटरों से निकलने वाले धुएं को कैप्चर करता है। इन उपकरणों की मदद से वैज्ञानिकों ने एक साल में 300 किलो पार्टिकुलेट मैटर कैप्चर किया है। पार्टिकुलेट मैटर यानी धुएं में मौजूद ठोस कण। ये इतना प्रदूषण है जिससे 15 सौ अरब लीटर हवा प्रदूषित हो जाती। इन्होंने 35 जगहों साइटों पर ये उपकरण लगाया है।

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